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शनिवार, 23 मई 2020

चंदेल राजाओ के काल में बने बुंदेलखंड के इस तालाब में प्रशासनिक अनदेखी के कारण छाये संकट के काले बादल।



//प्रशांत जैन 'पंकज'//
बक्सवाहा(छतरपुर)।  मप्र पर्यटन विभाग के अंतर्गत आने वाले जैन तीर्थ नैनागिर में बुंदेलखंड के प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम नजर आता है जहाँ पर मंदिरो के मध्य कमल पुष्पो के साथ अपनी सुंदरता बिखरता 
है. ये विश्व प्रसिद्ध स्थल है और इसके दर्शन करने एवं तालाब की सुंदरता देखने के लिए देश-विदेश से यात्री यहां पर आते है।
(पहले की फाइल फोटो)
        लेकिन यहां प्रशासनिक परवरिश ना होने के कारण यह क्षेत्र अपनी दशकों चली आ रही पुरानी विरासत खोता चला जा रहा है, बुंदेलखंड  की शान कहे जाने वाले नैनागिर का महावीर तालाब जो करीब 14 एकड़ के रकवे मैं फैला हुआ है लेकिन यहां पर बढ़ता अतिक्रमण और रख रखाव समाप्त होता जा रहा है।
            नैनागिरी के मंदिरो के मध्य मैं चंदेल कालीन तालाब स्थित है जिससे यहां की सुंदरता के साथ साथ जल स्तर और गर्मियों मैं पशुओं को पानी पीने के लिए बहुत बड़ा सहारा है
 इस मगर तालाब को बायी ओर से धीरे-धीरे एक तरफ अतिक्रमण करने वाले लोगों के द्वारा खेती की जमीन मैं बदला लिया गया है तो वही तालाब के दायी ओर से इसके बधान की दीवाल कही-कही से गिरकर क्षतिग्रस्त हो गई है जिस कारण बरसात मैं तो ये तालाब जल्द ही उबाल मारते हुए भर जाता है और रख रखाव के अभाव मैं सारा पानी बधना से रिसाव होने के कारण व्यर्थ ही बह जाता है जिससे बहुत जल्दी ही कम समय में इस तालाब की सुंदरता और जल निधि बर्वाद हो जाती है।
         इस तीर्थ क्षेत्र के समाजसेवियों और मंदिर कमेटी द्वारा कई बार शासन प्रशासन से मदद की गुहार लगाई मगर शासन ने इस ओर अभी तक कोई ध्यान नही दिया है।
       हालांकि कमेटी और समाजसेवियों ने आपने स्तर पर इसके बचाव के कई उपाय किये जिससे अभी तक इसका अस्तित्व  बरकरार है,लेकिन अगर अब इस स्थल को प्रशासन ने आगे नही संजोया तो यह इतिहास भी विरासत के पन्नों से जल्दी ही खत्म हो जायेगा।

●   क्या हो सकता है कार्य...

   प्रशासन द्वारा अगर वर्तमान समय में आस-पास फैले हुए अतिक्रमण को हटाकर तालाब गहरीकरण के लिए मनरेगा या अन्य योजनाओं का उपयोग करके यदि इस तालाब का गहरीकरण एवं रख-रखाव पूर्ण संरक्षण किया जाये तो यह चंदेल कालीन महावीर तालाब अपने अनुपम नज़ारे के साथ वापिस लौटकर प्राकृतिक सौंदर्य का एक जीता हुआ उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।

●  इनका कहना है कि...

"मापदंडों के अनुसार अगर पाया गया तो निश्चित ही जांच कर पुनः जीर्णोद्धार कराया जाएगा।"

हिमांशु चंद्र CEO जिला पंचायत छतरपुर