//जसवंत सिंह यादव//
बिजावर(छतरपुर)। बिजावर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में वटसावित्री पर्व को लेकर सवेरे से ही महिलाओं में उत्सवी माहौल देखा गया। सुहागिन महिलाएं नए वस्त्र, लहठी, सिंदूर धारण कर माथे पर कलश व हाथ में डोली लेकर सखी सहेलियों के साथ गीत गाती हुई वटवृक्ष के तले जा कर पूजा अर्चना की तथा सत्यवान व सावित्री की अमर कथा का श्रवण किया।वहीं वट वृक्ष के लगाए फेरे
और नव विवाहिताओं ने वट सावित्री पूजा को लेकर खास उत्साह दिखने को मिला। वट वृक्ष को आम, लीची मौसमी फल अर्पित करने, कच्चे सूत से बांधने और हाथ पंखे से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ इसकी परिक्रमा की। पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी जाती है। बिजावर सहित पूरे क्षेत्र में व गांव गांव और मुहल्ले मुहल्ले व इत्यादि जगहों यह पर्व धूमधाम से मनाया गया। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन पड़ने वाले इस पर्व मंे सुहागिन महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर वट वृक्ष की 12 बार परिक्रमा की और फल-फूल चढ़ाकर सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की।
● व्रत से जुड़ीं मान्यताएं।
संस्कृत वेदाचार्य पंडित कौशल किशोर शास्त्री जी कहते हैं कि ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को हिन्दू महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख प्राप्त होता है। मान्यता यह भी है कि इसी दिन सावित्री ने यमराज के चुंगल से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। उसी दिन से यह पर्व चलन में आया।
● बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है।
वहीँ महिलाओं द्वारा बताया गया कि वट वृक्ष को सावित्री के रुप में मानती है। पुरानी मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है। इसलिए लोग वर्षों से इसे देव वृक्ष मानते आ रहे हैं। लोगो का मानना है कि इस वट वृक्ष के पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महिलाओं ने बांस की टोकरी में सप्त धान, गेहूं, चावल, तेल, कांगनी समेत अन्य सामाग्री लेकर वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पहले ब्रह्मा सावित्री और फिर सत्यवान सावित्री की पूजा की।
● पति की दीर्घायु को लेकर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा।
वहीँ छतरपुर जिले की सभी पंचायत के विभिन्न गांव में महिलाओं ने पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर वटवृक्ष की पूजा की। एक तरफ जहां महिलाएं समूह में गीत गाते हुए माथे पर कलश लेकर वटवृक्ष की ओर जा रही थी। वहीं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर वटवृक्ष के 108 फेरे लगाए।