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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

MP नर्सिंग फर्जीवाड़ा: सीबीआई की रिपोर्ट में पात्र पाए गए 169 कॉलेज...परीक्षाओं का खुला रास्ता।


मप्र हाईकोर्ट द्वारा मप्र में हुए नर्सिंग फर्जीवाड़े से संबंधित मामले में हाईकोर्ट में 8 फरवरी को हुई सुनवाई का आदेश सोमवार 12 फरवरी को प्रात हुआ।

//सुनील केवट//

नेटवर्क जबलपुर। हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स एसो. के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित अन्य मामलों पर सुनवाई कर सोमवार को जारी किए गए अपने विस्तृत आदेश के अनुसार प्रदेश में हुए नर्सिंग मान्यता फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच की रिपोर्ट में 308 नर्सिंग कॉलेजों में से 169 नर्सिंग कॉलेज पात्र पाए गए हैं। वहीं 74 नर्सिंग कॉलेज मानकों को पूरा नहीं करते हुए कमियां युक्त पाए गए हैं इसी के साथ प्रदेशभर के 65 नर्सिंग कॉलेज लागू मापदंडों पर अपात्र पाए गए हैं।परीक्षा के रास्ते खुले हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए सीबीआई जांच में पात्र पाए गए 169 नर्सिंग कॉलेजों के आगे संचालन एवं उनके छात्रों की परीक्षा के रास्ते खोल दिए हैं। वहीं दूसरी ओर जिन 74 नर्सिंग कॉलेजों में सीबीआई की रिपोर्ट में कमियां पाई गई है। उनके लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई जाएगी जो कि कॉलेजों में पाई गई कमियों का अध्ययन कर अगर उनकी कमी पूर्ति समयावधि में की जा सकती है तो इस संबंध में अपनी अनुशंसा हाइकोर्ट को प्रस्तुत करेगी इसके साथ ही उन कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को अन्यत्र किन कॉलेजों में स्थानांतरित किया जा सकता है इस संबंध में भी अपनी अनुशंसा हाईकोर्ट को सौंपेगी।अपात्र कॉलेजों पर नहीं बरती जाए नरमी हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि जो 65 कॉलेज सीबीआई की जांच में अपात्र पाए गए हैं उनमें प्रवेशित छात्रों एवं उन संस्थाओं के साथ कोई भी नरमी नहीं बरती जानी चाहिए बल्कि एवं इन नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दिलाने में जिन-जिन अधिकारियों और निरीक्षण टीमों द्वारा गड़बड़ी की गई है उन पर भी सख्त कार्यवाही की जाएगी।

 हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रदेशभर में शेष बचे हुए समस्त नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने के आदेश भी दिए हैं गौरतलब है कि याचिकाकर्ता द्वारा आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था की कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान भी अपात्र संस्थाओं को मान्यताएँ लगातार दी गई है ऐसे समस्त संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई कर उनकी निरीक्षण रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी हाइकोर्ट ने कार्रवाई करने के आदेश सरकार को दिए है।

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