//रमेश अग्रवाल//
नेटवर्क पन्ना। भाजपा सरकार द्वारा किसानों की फसल का उचित दाम किसानों को मिल सके इसलिए भाजपा ने समर्थन मूल्य रवि एवं खरीफ़ की फसलों के लिए समर्थन मूल्य लागू पर खरीदी प्रारम्भ की थी।ताकि किसानों को उचित दाम मिल सके। लेकिन आज की दृष्टि में देखें तो सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में किसान ही परेशान हैं। उक्त बात ब्लॉक काँग्रेस कमेटी देवेन्द्रनगर के ब्लॉक उपाध्यक्ष रामकरण पाण्डेय ने औपचारिक चर्चा में कही।मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जहां यही स्थिति निर्मित है कि आज उपार्जन केंद्रों में गेहूं , चना , मसूर ,सरसो की खरीदी की जा रही है। आपको ज्ञात करा दे की चने के 29 अप्रैल से 6 ,6 किसानों की एसएमएस के जरिए किसानों को उपार्जन केंद्र में बुलाया जाता है। किसान अपना साफ स्वच्छ चना लेकर भी जाते हैं लेकिन इसके बावजूद भी उपार्जन केंद्रों में नियुक्त सर्वेयर चने को रिजेक्ट करते हैं और कहते हैं कि हमें ऊपर से निर्देश नहीं है की चने में तेवड़ा मान्य है जब इस संबंध में पन्ना जिले के सर्वेयरो से जानकारी ली गई तो उन्होंने साफ-साफ बताया पन्ना विपणन अधिकारी इंद्रपाल सिंह राजपूत का निर्देश है कि चना में एक भी तेवड़ा मान्य नहीं होगा।आप हम सभी जानते है कि ऐसा चना बहुत कम होता है कि जिसमें तेवड़ा न हो।जबकि भाजपा शिवराज सरकार का कहना है कि किसानों के खेत की मिट्टी भी चने के दाम में बिकेगी। तो यह केवल सरकार की बादखिलाफी ही समझी जाये।पिछले साल कमलनाथ की सरकार में किसानों को कोई भी ऐसी समस्या नहीं आई जो आज भाजपा के शासनकाल में किसानों को समस्याएं हो रही हैं वैसे भी देश वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में है और वहीं दूसरी तरफ किसानों पर यह मुसीबतें खड़ी हो रही है। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा का चाल चरित्र कुछ और ही है अर्थात कथनी और करनी दोनों अलग है।श्री पाण्डेय ने पन्ना कलेक्टर से माँग की है कि किसानों का अनाज उपार्जन केन्द्रों में खरीदी प्राथमिकता के साथ कराईं जाये जिससे किसान अपनी उपज का उचित रेट प्राप्त कर सकें।