- अनिकेत सिंह (छतरपुर)
कामयाब होने के बाद का प्लान तो सबके पास है लेकिन यदि फैल हो गए तो क्या करेंगे किसी को पता नहीं।
ये शब्द थे स्व. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के जिन्होंने ms dhoni, छिछोरे जैसे फिल्मों में अपना रोल करके उन्हें अमर बना दिया, लेकिन खुद अमरत्व शब्द का मतलब भूल गए, मै निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहा हूं, लेकिन कल की खबर सुनकर स्तब्ध सा हूं, खबर थी जाने माने एक्टर सुशांत_सिंह_राजपूत ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली, जोकि सर्वविदित है। अब बात आती है सफलता की, मेरा मानना है कि सफलता की जो परिभाषा हमें यूरोपीय ढंग से पढ़ाई जाती है! वह पूर्ण रूपेण सत्य नहीं है, ऐसी परिस्थितियों में वह विचारणीय है। मैं रोज किन्हीं न किन्हीं युवा वर्ग (खासकर) का स्टेटस देखता हूं, #feeling_alone , #feeling_sad , #mood_off आदि बातों से भरा पड़ा रहता है, आज या तो युवा opposite gender attraction वाले प्रेम जाल से बाहर नहीं आ पा रहे है, या फिर अपने फ्यूचर को लेकर चिंतित है जोकि कम ही है, इनमें अधिकता पहले वाले कारण की ही है। अब इन सबके आगे एक सबसे बड़ी समस्या है जोकि असल जीवन में मित्र की कमी है, अब आभासी जीवन (सोशल लाइफ) में भालेही आपके मित्रों की सूची 10 पन्नों की हो ये अलग बात है। लेकिन याद रहे वो केवल एक आभासी जीवन ही है, वास्तविक नहीं। उदाहरण उठा कर देख लीजिए मित्र हमेशा आपके पहले मरने को तैयार होता #अंगराज_कर्ण। इसलिए समस्त युवा वर्ग से निवेदन है कि आभासी जीवन में नहीं वास्तविक जीवन में मित्र बनाए, मित्र ऐसे जिनको आप अपने मन की बात कह सकें उसकी बात सुन सकें उससे अच्छी बुरी सलाह ले सकें, मित्र ऐसे जिनके साथ आप खुलकर हस सकें आप खुलकर रो सके अपनी परेशानी बयां कर सकें। और सबसे बड़ी बात किसी भी व्यक्ति या किसी भी वस्तु को अपने जीवन में इतनी जगह न दें कि उसके बाद आपको अपनी जिंदगी ही छोड़नी पड़े।
अंत में इतना ही कहूंगा खुश रहें, गम में भी खुशी ढूंढे वादा करता हूं जिंदगी से प्रेम बढ़ता जाएगा।