सुनो लड़की, दिल की सुनो:- अंकिता खंडेलवाल
क्या कह रहा है? तुम्हारा दिल
क्या हैं वो जज्बात? जो छुपा रखे हैं तुमने।
क्या तुमने कभी कोशिश की?
अपने दिल की आवाज सुनने की।
क्या तुम जानती हो?
कितना सुकून देता है यह।
कभी-कभी जिंदगी की दौड़ में
तुम खुद को भूल जाती हो।
अपने दिल की आवाज को
तुम अक्सर दबा देती हो।
पर सच तो यह है
वो तुम्हें लगातार पुकारती रहती है।
सुनो लड़की, दिल की सुनो....
खोलो तुम, दिल में छुपी उलझनों को
क्या कुछ ऐसा है? जो तुम बयां नहीं कर पाई
क्या तुम्हें कोई तकलीफ है?
क्या तुम्हें कोई तंग करता है?
कहीं तुम खुद से ही तो, जंग नहीं लड़ रही हो?
खुद की ख्वाइशों को खुद से ही, छीन तो नहीं रही हो?
देखो, जिंदगी बहुत खूबसूरत है
इसे खुल कर जीना सीखो तुम।
भले ही सबकी सुनो
लेकिन खुद की भी कहना सीखो तुम।
सुनो लड़की, दिल की सुनो
खुद को जानो, खुद को पहचानो
खुद से ही तुम, ढेरों बातें करो।
क्या चाहती हो तुम?
क्या है तुम्हारा सपना?
किसी से प्यार है तुम्हें?
कौन है तुम्हारा अपना?
खुश हो न तुम?
या है जिंदगी में गम।
मानती हूं, कभी कभी टूट जाती हो तुम
चकनाचूर हो जाते हैं सपने
बह जाती हैं उम्मीदें
पर सुनो, कभी हार मत मानना तुम।
हिम्मत से खड़ी रहना
मुश्किलों का सामना करना
खुद की ताकत पहचानना
बिना डरे भिड़ जाना।
सुनो लड़की, दिल की सुनो....
अपने आप से तुम प्यार करो
खुद को सम्मान दो
अहमियत दो
अपने सफर की मार्गदर्शक बनो।
सुनो, जैसी हो सुंदर हो तुम
बस खुद को पूरे दिल से स्वीकारों तुम।
बस खुद को पूरे दिल से स्वीकारों तुम।
लेखन- अंकिता खंडेलवाल
भरतपुर (राजस्थान)