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सोमवार, 17 जुलाई 2023

सरकार! आपकी एम्बुलेंस बड़ी व्यस्त हैं....मरने के बाद तो शव वाहन भी उपलब्ध नहीं हुआ...यह कैसी व्यवस्था?....बेटे का इलाज कराने गई मां पर सिस्टम की लाचारी।


मानवता हुई शर्मसार

(1) हाथ ठेले पर लेट कर पहुंचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

(2) हाथ ठेले पर हुआ ईलाज

(3) हाथ ठेले पर गई जान

(4) हाथ ठेले पर ले जाया गया शव

//राहुल जैन//

बक्सवाहा(छतरपुर)। बक्सवाहा में मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है जिसमें परिवार के सदस्य को उसकी मां, और पत्नी हाथ ठेले पर लादकर पैदल ही अस्पताल जा पहुंची, तब तक उसके सदस्य की मौत हो जाती है, बड़े बड़े वादे करने वाली सरकार की सारी योजनाएं तब धरी रह गई जब बक्सवाहा निवासी अपने परिवार के सदस्य को इलाज करवाने के लिए हाथ ठेला से जाते देखा गया परिजनों का आरोप है कि समय पर एंबुलेंस और इलाज मिल जाता तो उसकी मौत नहीं होती, लेकिन एंबुलेंस की नहीं पहुंचने से बेटे की जान चली गई जानकारी के अनुसार मामला बक्सवाहा क्षेत्र के वार्ड नंबर 14 का है जहां  जशोदा बंसल अपने बेटे महेंद्र बंसल का इलाज कराने के लिए हाथ ठेला से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची उन्होंने बताया कि हमारे बेटे की पीठ में एक बड़ा ट्यूमर है जिसका इलाज जबलपुर मेडिकल कॉलेज में होना है कुछ दिन पहले जब हम बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो इलाज के दौरान दमोह रेफर कर दिया गया दमोह में इलाज ना होने के कारण हमें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड भी लगाया गया लेकिन अस्पताल के डॉ ने आयुष्मान कार्ड का उपयोग ना समझते हुए हम लोगों का बिना इलाज किए ही हॉस्पिटल से बाहर कर दिया और कहा कि आप के मरीज का ऑपरेशन नहीं हो सकता, अगर आपको ऑपरेशन करवाना है तो आप पैसों की व्यवस्था करिए हम निर्धन परिवार के लोग कहां जाएं और अपनी व्यथा किसको सुनाएं जसोदा बंसल ने कहा है कि हमारे बेटे महेंद्र बंसल का ट्यूमर सुबह अचानक फूट गया जिस कारण से उसको घबराहट के साथ-साथ काफी दर्द महसूस होने लगा जिसके बाद हमने कई बार 108 को कॉल किया लेकिन फोन नहीं लगा पैसे के अभाव में मां ने बेटे की तकलीफ देखकर वह खुद ही  मोहल्ले में रखे हाथ ठेले को उठाकर अपने बेटे को लिटा कर पैदल अस्पताल की ओर चल पड़ी 1 किलोमीटर का सफर तय कर अस्पताल पहुंची जहां डॉ आसाटी और कम्पोन्डर सचिन ठाकुर द्वारा यथा संभव इलाज किया लेकिन बकस्वाहा मे प्राथमिकी इलाज के बाद दमोह रिफर कर एम्बुलेंस का इन्तजार किया जा रहा था तब तक मेरे बेटे ने दम तोड़ दिया। 

इलाज ना होने पर मरीज की गई जान

 सुबह जब इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीज को ले जाया गया जहां डॉक्टर द्वारा उसका इलाज किया गया लेकिन उमर फूट  जाने के कारण उसका तुरंत ऑपरेशन होना था लेकिन सोचने वाली बात है कि जब मरीज को बक्सवाहा से जबलपुर रेफर किया गया था आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद भी जबलपुर मेडिकल मैं मरीज को इलाज नहीं दिया क्या प्रदेश की सरकार गरीब परिवार के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बना रही है लेकिन इसका उपयोग सही समय पर हो जाता तो आज उस मरीज की जान नहीं जाती।

मौत के बाद शव बाहन भी नही हुआ उपलब्ध

परिचितों की मदद से पत्नी को हाथ ठेले  से ही घर ले जाना पढा पति का शव

इनका कहना है....

उनके परिवार के द्वारा शव वाहन की मांग नहीं की गई, जैसे ही हमें जानकारी लगी वैसे ही शव वाहन की व्यवस्था कराई गई, शव वाहन आने से पहले ही परिजन शव को  हाथ ठेले से ले गए।

ललित उपाध्याय, बीएमओ बक्सवाहा