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मंगलवार, 19 मार्च 2019

सामुदायिक केन्द्र बना मजाक,आनिमित्ताओ का मिलता है अंम्बार।

बीमार अस्पताल को इलाज की दरकार।


 सामुदायिक केन्द्र बना मजाक,आनिमित्ताओ का मिलता है अंम्बार।


सरकार के वादो और दावो की पोल खोलती हुई बुंदेलखंड प्रजेंट न्यूज की यह रिपोर्ट।

//रूपेश जैन//

 बक्सवाहा(छतरपुर)। जिले छतरपुर के सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र बकस्वाहा मे निजी कंम्पाउडर द्वारा किये गये गलत उपचार के कारण एक छः वर्ष की मासूम को अपनी जान से हाथ धोना पडा।
यह कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि सामुदायिक केन्द्र बकस्वाहा मे आव्यस्थाओ का अंम्वार लगा रहता है अगर देखा जाये तो अनिमित्तओ के नाम पर इस अस्पताल का नाम भी शीर्ष पटल पर रहता है।
इन दिनो अगर देखा जाये तो किसी मरीज को उचित इलाज न मिलना तथा शव या मरीज को लाने ले जाने के लिए वाहन का ना मिलना तो इस अस्पताल का एक अलग मिजाज ही बन गया है।
 आमतौर आव्यवस्थाओ के नाम पर सुर्खियो मे रहने वाले इस अस्पताल से इंसानियत को शर्मशार करने तथा शासन द्वारा चलायी जाने वाली विभिन्न योजनाओ को पलीता लगाने जैसी तस्वीरे एक वार फिर सामने आयी है।
 जानकारी के आनुसार रविवार को करीब दोपहर तीन बजे छः वर्षीय बच्ची को लेकर परिजन सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र पर पहुंचे तो उपचार के दौरान तथा कथित एक निजी कंपाउंडर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने से छः साल की बच्ची की मौत हो गई।
जिसके बाद परिजनों को लगभग बीस घण्टे शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए इंतजार करना पड़ा।
 जिसके पश्चात शव ले जाने को भी शव वाहन नसीब नहीं हुआ तो परिजनो को अपनी बच्ची का शव सर पर रख कर ले जाना पडा।

जानिए क्या है पूरा मामला

 वार्ड नंबर 1 निवासी निर्पत पटेल की छः वर्षीय बच्ची राधा की ब्रजेश अहिरबार कंपाउंडर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाने से मासूम की जान चली गई। पीड़ित परिजनों ने इस संबंध मे थाना बक्सवाहा में कंपाउंडर ब्रजेश अहिरवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी।
जिसके लगभग बीस घण्टे बाद जब शव को परिजनो के हाथो सौपा गया तो उस समय शव ले जाने के लिए शव वाहन भी नसीब न हुआ।

आये दिन मिलती है शिकायते देखी जाती है साफ मनमानी

 सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र बकस्वाहा के अंतर्गत आने वाली 39 ग्राम पंचायतों के लगभग 121 गांवो का संम्पर्क इसी अस्पताल से रहता है। यहां बीएमओ डाॅ एलएल अहिरवार तथा अस्पताल प्रशासन के लापरवाह रवैये से जूझते हुये क्षेत्र तथा की जनता एवं परेशान लोगो द्वारा कई बार ज्ञापन, चक्काजाम तथा विभिन्न आंदोलन करने के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र आज भी मजाक बना हुआ है।
अब देखना यह भी खास होगा की इस बीमार अस्पताल को समस्याओ से निजात मिल पाता है या नही।