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शनिवार, 16 मार्च 2019

बीएमओ की तानाशाही एवं सिरफिरा अंदाज। अस्पताल मे लिखवाया पत्रकारो का अंदर आना मना है।

बीएमओ की तानाशाही एवं सिरफिरा अंदाज।


//अखंड यादव// 

बल्देवगढ़(टीकमगढ)।  समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बल्देवगढ़ के बीएमओ एस के छिलवार आए दिन सुर्खियों में बने रहते है।
 यहां तक की उनकी सिर फ्री इस अंदाज ने यह भी घोषित कर दिया कि श्रीमान प्रमुख पद के लायक भी नहीं है यहां तक कि जिला प्रशासन और बीएमओ की सांठगांठ के चलते आए दिन विवादों में रहते है।
 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक नया मामला इस तरीके से सामने आया कि मानो भारतीय संविधान के चौथे स्तंभ को भी तार-तार कर बैठे अब देखना है कि इन पर किस प्रकार से कार्रवाई होती है या फिर जिला प्रशासन द्वारा पुरस्कार प्राप्त होता है।
बल्देवगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैं अचानक दोपहर के 12:00 बजे एक ऐसा मामला सामने आया जिसको सुनकर सारी विधानसभा में सनसनी फैल गई यह मामला भारतीय संविधान के चौथे स्तंभ पत्रकारों को लेकर है जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बल्देवगढ़ प्रबंधन द्वारा अस्पताल परिषद की बाउंड्री एवं मुख्य गेट पर एक सूचना चशपा करवाई गई जिसमें साफ साफ अक्षरों पर लिखा पत्रकारों को अस्पताल परिषद में आना सख्त प्रतिबंधित है।
जबकि श्रीमान यह भी भूल गये कि बीएमओ को यह पावर भी नहीं कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किसी पर रोक लगा सकें यह एक साफ साफ देखने को मिल रहा है कि श्रीमान द्वारा तानाशाही लगातार बढ़ती जा रही है।
 अभी हाल ही में कुछ दिनों पूर्व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पत्रकारों द्वारा खुफिया कैमरे के माध्यम से अस्पताल के कर्मचारियों की पैसे के लेनदेन की वीडियो प्रकाशित की गई थी।
और हाल ही में एएनएम के साथ बाबू द्वारा मारपीट कर बदसलूकी का मामला भी पत्रकारों ने उजागर किया जिसके चलते बीएमओ में अपनी मनमानी को उजागर ना होने देने के एवज में पत्रकारों पर प्रतिबंध लगा डाला बारे प्रशासन वारे भारतीय संविधान जो इन चंद कर्मचारी अधिकारियों के हाथ में आने पर संविधान के नियमों को भी चूर चूर करने में पीछे नहीं हट रहे तभी यह सूचना जब पत्रकारों को लगी तो समस्त पत्रकार एकत्र होकर अनुभाग विभाग अधिकारी कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा जिसमें उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्पताल के अंदर जाने पर निषेध लगाया गया।
 और जिस से उनकी घोर लापरवाही भ्रष्टाचार एवं तानाशाही नीति को उजागर नहीं कर पाए क्योंकि हाल ही में कई ऐसे मामले उजागर किए गए हैं जो बहुत निंदनीय भी रहे जिस संबंध में जिला सीएमएचओ को भी अवगत करा दिया गया पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होती सिर्फ आश्वासन ही प्राप्त होता है अब तो मानना है कि जैसे बीएमओ और जिला प्रशासन की सांठगांठ इस हद तक पहुंच गई थी।
अब गलत करने वाले पर भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होगी यहां तक की अभी कुछ दिन पूर्व एएनएम के साथ मारपीट के मामले में निष्पक्ष प्रस्ताव रखने वाली एक स्टाफ नर्स को भी उसके ही रूम से निकालने के लिए एक नोटिस जारी कर दिया गया जबकि अधिकांश नर्स एवं डॉक्टर मुख्यालय पर ही नहीं रहते है और एक स्टाफ नर्स कई वर्षों से मुख्यालय पर रह कर नियम अनुसार अपने कर्तव्य का निर्माण कर रही है यहां तक कि बीएमओ के द्वारा ही मुख्यालय पर निवास नहीं करते और अधिकांश जब भी उनसे संपर्क किया जाए तो घर में लेटे लेटे बोल देते हैं कि मैं फिल्ड पर हूं श्रीमान अस्पताल में तो आए तो फिर फील्ड में जाएं यह घोर लापरवाही एवं प्रणाली के चलते अब आम जीवन अस्त-व्यस्त है।

इनका कहना है कि.....

जब इस संबंध में सीएमएचओ वर्षा राय से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं अभी इसके बारे में जानकारी लेती हूं।

(वर्षा राय, सीएमएचओ टीकमगढ)


जिसके बाद फिर जब कमिश्नर सागर से बात हुई......

 यह बहुत गलत बात है और इस प्रकार का अगर बीएमओ द्वारा चश्पा करवाएं गया तो मैं अभी कलेक्टर को संपर्क में लेकर उसके ऊपर कार्रवाई के लिए बोलता हूं।

(श्री मनोहर लाल दुबे , कमिश्नर सागर)