पैसे के आभाव में इलाज ना होने से मासूम की मौत।
ब्यूरो टीकमगढ़। शासन-प्रशासन अंतिम छोर तक खड़े व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कितना भी दंभ क्यों न भर रही हों, लेकिन हकीकत इससे कहीं अधिक जुदा हैं। आलम यह हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी गरीब समुचित उपचार के अभाव में अपने बच्चों की मौत देखने के लिए बेवस हैं। जतारा के ग्राम वैदपुरा में आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक आदिवासी के पास पैसे की व्यवस्था न होने से वह अपनी 3 वर्ष की मासूम बेटी का उपचार नहीं करा सका और उसकी मौत हो गई।
जतारा जनपद की ग्राम पंचायत वैदपुर निवासी रुपराम आदिवासी के पास न जमीन हैं न आय का कोई जरिया। किसानों के खेतों में मजदूरी कर रूपराम अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा हैं। पिछले एक सप्ताह से रुपराम की 3 वर्ष की बेटी सरोज बुखार से पीडि़त थी।
रूपराम ने उसे गांव के ही किसी डॉक्टर को दिखाया और सरोज को थोड़ा आराम हो गया। सरोज को बुखार से आराम मिलने पर वह खेलने के लिए घर से बाहर निकली और दरवाजे पर गिर पड़ी। सरोज के दरवाजे पर गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आई और खून निकलने लगा।
जिसके बाद पैसे के आभाव के चलते इलाज कराना मुश्किल हुआ और बच्ची ने दम तोड़ दिया।