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शनिवार, 16 मई 2020

संपादकीय:- क्या हार गई जिंदगी?...वो लौट कर घर ना आएंगे इसका जिम्मेदार कौन सरकार या वो बेवड़े जो शराब पीकर वाहन चलाते हैं या फिर और कोई???



//संपादकीय:-शिवराम अठि्या//
सरकार बताये ? और कितनी रुदन, दुख और लाशों को देखोगे तब जाकर तुम सबकी मानवीय संवेदनायें जागेगीं!
अगर विचार किया जाए तो जब से लॉक डाउन में शराब बिकना चालू हुई है तभी से आए दिन ऐसे मामले देखने और सुनने को मिल रहे हैं।
अब यह दुख देखा नही जा रहा है, देश से लेकर प्रदेशों की सरकार इस मामले में पूरी तरह नाकाम हुईं हैं।
अगर ये सब सरकार के बस से बाहर हो गया है तो तो उन्हें दूसरे तरह से मौत की नींद सुला दो
ऐसें मरने से अच्छा तो उन्हें दूसरे तरह से मौत की नींद सुला दो!....सरकार अगर इन्हीं प्लेटफॉर्म को देखकर जागती है तो बंद करें वो विभाग जो ऐसीं स्थितियों को भांपने के लिए नियुक्त की गईं हैं।
जिन तस्वीरों को देखने पर रूह कांप रहीं हैं वहां सरकारें निष्ठुर बनी हुई तमासा देख रहीं हैं। .. शासन/प्रसासन की यह नाकामी इतिहास के पन्नों पर काले शब्दों से लिखी जायेगी!