Translate

सोमवार, 11 मई 2020

घुवारा। प्रशासनिक ढील के चलते जनता हुई बेकाबू...नियमों की भी उड़ रही है धज्जियां।



//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। विश्व के अनेक देश इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं,सरकार और प्रशासन द्वारा हर रोज नए-नए दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं, और सोशल डिस्टेंस,मास्क पहनने की अनिवार्यता आदि का उल्लेख अब सिर्फ कागजों में ही किया जा रहा है।
लेकिन वास्तविक हकीकत कुछ और ही है।भीड़ बेकाबू होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रही है ।माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा जनधन खाता धारकों के खातों में 500₹ की राशि स्थानांतरित की गई है। इन पैसों को पाने के लिए जनता सुबह से ही बैंको के चक्कर लगाने लगती है। बैंको के बाहर लगीं कतारों में सोशल डिस्टेंस एवं मास्क की अनिवार्यता का ध्यान न तो जनता स्वयं रख रही है न ही प्रशासन।
वहीं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक घुवारा में शाखा प्रबंधक महोदय की मनमानी भी ग्राहकों कि परेशानियों को बढ़ा रही है,साहब का निवास स्थान छतरपुर है,वह छतरपुर से अपडाउन करते है । शाखा प्रबंधक की कार्यशैली पर किसानों ने नाराजगी जाहिर करते हुए पत्रकार रविन्द्र जैन रवि को बताया कि साहब 12 बजे तक छतरपुर से आते हैं जिससे हम किसानों को घण्टों इंतजार करना पड़ता है और भीड़ निरन्तर बढ़ती ही जाती है। भीड़ बढ़ने से सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं होता क्योंकि कृषकों की संख्या काफी है और अभी किसानों को फसल विक्रय कि राशि प्रदान की जा रही है।
यदि शासन प्रशासन ने इस बेकाबू भीड़ वाले स्थलों पर ध्यान नहीं दिया तो हमारे जिले में भी कोविड-19 का खतरा आते देर नहीं लगेगी।
कृषक धनप्रसाद यादव मारोतखेरा, और राममिलन शुक्ला सेवार ने कहा कि हम किसानों की व्यवस्थाओं में कोई सहयोग नहीं करता, न ही किसानों की आवाज को कोई समय पर सुनता है।