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शनिवार, 13 जून 2020

पन्ना। जिले में शुरू हुआ "खनन का खेल" मशीनों से हो रहा काम...रोजगार की उम्मीद में प्रवासी 27 में 5 खदानों में उत्खनन की अनुमति, 10 से अधिक खदानों में शुरू हुआ काम।



//रमेश अग्रवाल//
नेटवर्क पन्ना।  कोरोना संकट के नाम पर प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की बात करते हुए रेत खदानों का आनन-फानन में अनुबंध कराया गया। बावजूद इसके प्रवासी श्रमिकों को इसका कोई फायदा मिलता नहंी दिख रहा है। जिले में 27 खदानों के रेत समूह को 31 करोड़ 61 लाख रूपये में रसमीत मल्होत्रा को स्वीकृत किया गया है। उक्त ठेकेदार द्वारा समस्त कागजी कार्यवाहियों को पूरा करते हुए पन्ना में उत्खनन शुरू कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पन्ना जिले की बीरा नंबर 3, मोहाना नंम्बर 2, कटर्रा, जिगनी और रामनई खदान में ही ठेकेदार को उत्खनन करने की अनुमति दी गई है। क्योंकि 27 में से यही पांच खदानें है, जहां विभिन्न विभागों की एनओसी प्राप्त की गई है। खनिज विभाग द्वारा यहां उत्खनन की अनुमति तो दी गई, लेकिन मषीनों के उपयोग को लेकर विसम परिस्थितियों में दी जाने वाली अनुमति के बारे में किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। जिला खनिज अधिकारी पन्ना से लेकर माईनिंग काॅर्पोरेषन के संभागीय कार्यालय टीकमगढ़ तक खदान में मषीनों के उपयोग को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। जबकि सभी खदानों में बकायदा विषालकाय मषीनों को उतरा गया है। जिससे जल्द से जल्द बारिष से पूर्व रेत का अत्याधिक भण्डारण किया जा सके। पूरी क्षमता के साथ मषीनों का उपयोग कर खदानों में दिन रात काम प्रारंभ हो गया है। ऐसे में रोजगार की उम्मीद में बैठे प्रवासी श्रमिकों की किसी को कोई परवाह नहीं है। खदान संचालक द्वारा मनमाने ढ़ंग से कार्य किया जा रहा है। मषीनों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों के पास जानकारी ही नहीं है। ऐसे में रेाक लगाने का सवाल ही नहीं उठता। बताया जाता है कि पूरा संचालन माईनिंग काॅर्पोरेषन कार्यालय भोपाल से ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। भोपाल के अधिकारियों द्वारा अभी तक जिला खनिज कार्यालय के साथ खदानों के संचालन तक की जानकारी साझा नहीं की गई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत संचालन में हो रहीं अनिमित्ताओं को रोकने और नियमानुसार खनन कराने में खनिज विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है।

●  ठेकेदार को मिली पूरी छूट।


खदानों में रेत का उत्खनन करने के लिए एनजीटी द्वारा पूरी गाइडलाइन तैयार की गई है। बावजूद इसके पन्ना में मनमाने ढ़ंग से उत्खनन प्रारंभ कर दिया गया है। गौरतलब है कि किसी खदान के संचालन के पूर्व ठेकेदार को खदान का सीमांकन कर जगह बताई जाती है। ताकि मनमाने ढंग से उत्खनन न हो। लेकिन पन्ना में एक भी खदान का सीमांकन नहीं कराया गया है। बिना सीमांकन ही खदानों का संचालन शुरू हो चुका है। इतना ही नहीं कोरोना संकट के चलते पंजीयक कार्यालय में होने वाला पंजीकृत अनुबंध भी निस्पादित नहीं हुआ है। बिना अनुबंध निस्पादन ही काम करने की पूरी छूट दी गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत के इस खेल में फर्म को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

●. कैसे मिलेगा स्थानीय लोगों को रोजगार।


कोरोना संकट में अपना काम छोड़कर महानगरों से वापस आए प्रवासी श्रमिकों के साथ स्थानीय श्रमिकों को संकट काल में रेाजगार उपलब्ध हो, इस मंषा के साथ खदानें प्रारंभ की गई है। लेकिन खदान संचालक द्वारा अपने लाभ के लिए अत्याधिक उत्खनन करने की मंषा से लोगों को रोजगार देने की बजाए मषीनों का उपयोग किया जा रहा है। जिससे लोगों में चिंता देखी जा रही है। यदि खदानों में इसी तरह मषीनों का उपयोग होता रहा, तो इन श्रमिकों को कहां से रोजगार प्राप्त होगा। इस दिषा में अभी तक न तो जिला प्रषासन ने कोई निर्देष दिए हैं और न ही कोई जनप्रतिनिधि इन श्रमिकों के लिए आगे आया है। यही कारण है कि ठेकेदार मनमर्जी से अपने काम को पूरा करने में जुटा है।