//रमेश अग्रवाल//
नेटवर्क पन्ना। कोरोना संकट के नाम पर प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की बात करते हुए रेत खदानों का आनन-फानन में अनुबंध कराया गया। बावजूद इसके प्रवासी श्रमिकों को इसका कोई फायदा मिलता नहंी दिख रहा है। जिले में 27 खदानों के रेत समूह को 31 करोड़ 61 लाख रूपये में रसमीत मल्होत्रा को स्वीकृत किया गया है। उक्त ठेकेदार द्वारा समस्त कागजी कार्यवाहियों को पूरा करते हुए पन्ना में उत्खनन शुरू कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पन्ना जिले की बीरा नंबर 3, मोहाना नंम्बर 2, कटर्रा, जिगनी और रामनई खदान में ही ठेकेदार को उत्खनन करने की अनुमति दी गई है। क्योंकि 27 में से यही पांच खदानें है, जहां विभिन्न विभागों की एनओसी प्राप्त की गई है। खनिज विभाग द्वारा यहां उत्खनन की अनुमति तो दी गई, लेकिन मषीनों के उपयोग को लेकर विसम परिस्थितियों में दी जाने वाली अनुमति के बारे में किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। जिला खनिज अधिकारी पन्ना से लेकर माईनिंग काॅर्पोरेषन के संभागीय कार्यालय टीकमगढ़ तक खदान में मषीनों के उपयोग को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। जबकि सभी खदानों में बकायदा विषालकाय मषीनों को उतरा गया है। जिससे जल्द से जल्द बारिष से पूर्व रेत का अत्याधिक भण्डारण किया जा सके। पूरी क्षमता के साथ मषीनों का उपयोग कर खदानों में दिन रात काम प्रारंभ हो गया है। ऐसे में रोजगार की उम्मीद में बैठे प्रवासी श्रमिकों की किसी को कोई परवाह नहीं है। खदान संचालक द्वारा मनमाने ढ़ंग से कार्य किया जा रहा है। मषीनों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों के पास जानकारी ही नहीं है। ऐसे में रेाक लगाने का सवाल ही नहीं उठता। बताया जाता है कि पूरा संचालन माईनिंग काॅर्पोरेषन कार्यालय भोपाल से ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। भोपाल के अधिकारियों द्वारा अभी तक जिला खनिज कार्यालय के साथ खदानों के संचालन तक की जानकारी साझा नहीं की गई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेत संचालन में हो रहीं अनिमित्ताओं को रोकने और नियमानुसार खनन कराने में खनिज विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है।

