Translate

गुरुवार, 28 नवंबर 2024

शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल घुवारा में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।

//विन्द्रावन विश्वकर्मा//

घुवारा(छतरपुर)। घुवारा के शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्कूल के छात्रों की नियमित कक्षाएं न लगने के कारण लंच टाइम के दौरान दोपहर 3 बजे सड़कों पर घूमते नजर आए। इस स्थिति ने स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के कई छात्र पढ़ाई छोड़कर स्कूल परिसर से बाहर सड़कों पर समय बिताते हैं। इनमें से कुछ छात्र मुख्य बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बेवजह घूमते देखे गए। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल के भीतर पर्याप्त पढ़ाई न होने के कारण छात्रों की रुचि कम हो गई है।

 प्राचार्य अल्का शुक्ला की भूमिका पर उठ रहे सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्कूल प्राचार्य की अनदेखी और अनुशासनहीनता इस स्थिति का मुख्य कारण है। शिक्षकों की नियमित कक्षाएं न लगने और छात्रों की गतिविधियों पर निगरानी की कमी के चलते बच्चों का भविष्य खतरे में है।

छात्रों के अभिभावकों ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक अभिभावक ने बताया, "हमने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजा ताकि वे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें, लेकिन यहां की व्यवस्था देखकर ऐसा लगता है जैसे बच्चों की पढ़ाई से किसी को कोई मतलब नहीं।"

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन और प्राचार्य पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि स्कूल में अनुशासन और नियमित कक्षाएं सुनिश्चित की जा सकें।

अब प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार।

इस मामले पर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है। इस मुद्दे को लेकर पत्रकारों ने प्राचार्य से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। घुवारा के इस स्कूल की स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को उजागर कर दिया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यहां के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

इनका कहना है कि....

आपके द्वारा जानकारी प्राप्त में अभी प्राचार्य से बात करता हु और मामले की जांच करवाता हु जांच उपरान्त कार्रवाई की जायेगी।

राजेंद्र प्रसाद प्रजापति, जिला शिक्षा अधिकारी