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गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

श्रमिकों के हालात से वेफिक्र हैं अधिकारी।

श्रमिकों के हालात से वेफिक्र हैं अधिकारी।


//अरवाज खान//

खजुराहो/राजनगर(छतरपुर)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मध्यप्रदेश में कार्यरत ,लगभग 600 श्रमिकों को एक साथ, मौखिक आदेश पर निकालने को लेकर खजुराहो में 51 कर्मचारियों ने जिन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है ,लगातार 31 मार्च से धरना प्रदर्शन एवं हड़ताल के चलते हालात बद से भी ज्यादा बदतर हो रहे हैं ,लेकिन प्रशासन बेफिक्र बना हुआ है यह चिंतनीय विषय है। कि एक दशक से भी ज्यादा समय से कार्य कर रहे यह 51 श्रमिक, जो खजुराहो में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में ,साफ- सफाई एवं रखरखाव के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे।
उन्हें अचानक तुगलकी आदेश के तहत बाहर का रास्ता दिखाएं जाने पर,इन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण एवं स्वयं के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है।
उम्र के इस पड़ाव में जब अधेड़ उम्र के यह सभी श्रमिक, बेरोजगार कर दिए गए तो उनके सामने आगे का कोई रास्ता दिखाई नहीं देता ,क्योंकि इस उम्र में अब कोई और दूसरा चारा भी नहीं है ,ऐसी स्थितियों में यह श्रमिक धरना, प्रदर्शन एवं आने वाले समय में ,भूख हड़ताल तथा आत्महत्या जैसे प्रयासों को भी अगर करें ,तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ,जैसा कि बिगत समय पहले एक मामला सांची से आया है जो एक व्यक्ति श्रमिक परिवार से था और बेरोजगारी के कारण आगे का कोई रास्ता ना दिखाई पड़ने से फांसी के फंदे पर लटक गया जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
गुरूवार को अनुविभागीय अधिकारी श्री स्वप्निल वानखेड़े को दिए गए ज्ञापन में, इन कर्मचारियों ने इनके साथ न्याय की मांग की, ज्ञापन में स्पष्ट है कि इन सभी श्रमिकों से संबंधित मामला न्यायालय में लंबित था।
और न्यायालय द्वारा 24 अप्रैल 2019 तक अगली सुनवाई तक सर्विस में यथावत रखने का स्पष्ट आदेश भी दिया गया है।
इसके बावजूद भी अधिकारियों के मनमाने पूर्ण रवैया के चलते ,मौखिक तौर पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जो न्यायालय की अवमानना भी कही जा सकती है।
जहां हमारे देश के प्रधानमंत्री अपने आप को चौकीदार कहते हैं, वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं में चौकीदार कहने की एक तरह से होड़ लग चुकी है ,वही असल में यह चौकीदार जो अपने दिन भर की मेहनत के बाद, कुछ मेहनताना के साथ अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे ,उन्हें बाहर का रास्ता दिखा कर बेरोजगार कर दिया गया।
      अब सबाल यह भी उठता है कि क्या हमारे देश में सिर्फ नारों की राजनीति चलेगी या वास्तविकता में भी कुछ कार्य होगा एवं बड़े-बड़े लुभावने वायदे एवं चुनाव के समय लंबे-लंबे आश्वासन ,गरीब, श्रमिक ,किसान, असहाय व बेरोजगारों के लिए, इमोशनल ब्लैकमेल वाले लंबे लंबे भाषणों से ही देश की जनता को बरगलाते रहेंगे..?????

भूख हड़ताल पर बैठे मजदूर।

31 मार्च से लगातार धरने में बैठे यह खजुराहो के 51 श्रमिक जिन में एक महिला भी है ,लगातार कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जिनमें से कुछ की हालत भी बिगड़ती जा रही है, पर मौका स्थल पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अभी तक नहीं पहुंचा है ,जिला प्रशासन व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इन कर्मचारियों से अपनी दूरी बनाए हुए हैं जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है, वह चिंता का विषय है इन बेरोजगार हुए श्रमिकों को शीघ्रता से न्याय दिलाए जाने की आवश्यकता है, जिससे कि आने वाले समय में कोई और अनहोनी होने से बचा जा सके।