Translate

शनिवार, 14 सितंबर 2019

ज्योतिष विद्या: जानिए पितृ अमावस्या के बारे में।

ज्योतिष विद्या: जानिए पितृ अमावस्या के बारे में।


BPN नेटवर्क। श्राद्ध पक्ष आश्विन में मनाया जाता है यह पक्ष भाद्रपद की शुक्ल पूनम से आश्विन मास अमावस तक रहता है इसमें आश्विन मास इसीलिए प्रमुख है कि पितरों का कारक बुध ग्रह कहां गया है और बुध की राशि अर्थात कन्या राशि में जब सूर्य आता है कन्या सक्रांति आती है तब पितृपक्ष का महापर्व होता हैश्राद्ध में कौवे का महत्व इसलिए महत्वपूर्ण है त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था और जयंत जो इंद्र का पुत्र था जयंत ने कौवे का रूप धारण कर माता सीता को घायल कर दिया था तब राम ने तिनके से ब्रह्मास्त्र चला कर जयंत की आंख फोड़ दी थी जब उसने अपने किए की माफी मांगी तब राम ने उसे यह वरदान दिया कि तुम्हें अर्पित किया गया भोजन पितरों को मिलेगा तभी से श्राद्ध में कौवे को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है तथा साथ में गाय और कुत्ते को भी भोजन कराने की परंपरा है पूनम से शुरू होता है एकम तिथि को नान श्राद्ध भी कहते हैं इस दिन दोहिता अपने नाना जी का श्राद्ध कर सकता है चाहे तिथि ज्ञात हो या ना हो और जितनी भी सभी मृत ईस्त्रि है उनकी श्राद्ध आप नवमी तिथि को यानी मातृ नवमी को कर सकते हैं और जितने पुरुष जातक है जिनकी पुण्यतिथि ध्यान ना हो अमावस को को उनका श्राद्ध कर सकते हैं।
14 सितंबर 2019: जिन लोगों की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो। इसी दिन नाना-नानी का श्राद्ध भी होता है।

15 सितंबर 2019: जिन लोगों का देहांत द्वितीय तिथि को हुई है, उनका श्राद्ध होता है।

16 सितंबर 2019: तृतीय तिथि को मरने वाले लोगों का श्राद्ध इस दिन होता है।

17 सितंबर 2019: जिनका देहांत चतुर्थी तिथि को हुआ हो।

18 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो। इसके अलावा इस दिन उनका भी श्राद्ध किया जाता है कि जिनकी मृत्यु कुवारेंपन में हुई हो। यही कारण है कि पंचमी तिथि को कुंवारा पंचमी श्राद्ध भी कहा जाता है।

19 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो।

20 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु सप्तमी तिथि को हुई हो।

21 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई हो।

22 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो। इस दिन परिवार की सभी स्त्रियों के श्राद्ध के लिए भी उचित माना जाता है, मुख्य रूप से माताओं को। नवमी तिथि को मातृनवमी भी कहा जाता है।

23 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु दशमी तिथि को हुई हो।

24 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु एकादशी तिथि को हुई हो।

25 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई हो। इसके अलावा इस दिन उन लोगों का भी श्राद्ध किया जाता है जिन्होंने मृत्यु से पूर्व संन्यास ले लिया हो।

26 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई हो। त्रयोदशी के दिन घर के मृत बच्चों का श्राद्ध करने के लिए भी शुभ माना जाता है।

27 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो। इसके अलावा चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध केवल उन लोगों के लिए शुभ होता है, जिनकी मृत्यु किसी हथियार से हुई हो। मर्डर, आत्महत्या या किसी हादसे में मारे गए हों।
28 सितंबर 2019: जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। इसके अलावा जिन लोगों को अपने मृत परिवारजनों की तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जा सकता है। यही कारण है कि इसे सर्व पितृ अमावस्या भी कहते हैं।