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बुधवार, 22 अप्रैल 2020

पुलिसकर्मी के बेटे ने अपने पिता के लिए लिखा यह गीत "ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते"


रचनाकार :- अमन शर्मा 

●  ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं

आर.पी.शर्मा (चौकी प्रभारी नरदहा,पन्ना)



चौबीस घंटे सातों दिन ये ड्यूटी निभाते हैं
सूनसान सड़कों पर यही पाए जाते हैं
छोटी सी गलती पर निलंबन आदेश पाते हैं
ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं

छोटे से क्वार्टर में जिंदगी बिताते हैं
महीनों के महीनों ये घर भी नहीं जाते हैं
फिर भी अपना घर ये व्यवस्थित चलाते हैं
ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं

पत्थर भी खाते हैं डंडे भी खाते हैं
नेता भी कभी कभी गाली दे जाते हैं
फिर भी अपना फर्ज ये बखूबी निभाते हैं
ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं

चोरी में जाते हैं मर्ग में भी जाते हैं
एक्सीडेंट हो जाए तो तुरंत पहुँच जाते हैं
बड़े-बड़े विवादों को पल में निपटाते हैं
ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं

मंदिर भी जाते हैं मस्जिद भी जाते हैं
चर्च और गुरूद्वारे में मस्तक झुकाते हैं
ये देश की धर्मनिरपेक्षता दर्शाते हैं
ऐसे ही नहीं ये देश के योद्धा कहलाते हैं।


●  अगर आप भी इसी प्रकार से लिखने के शौकीन हैं तो अपने रचनात्मक कार्य को भेज दीजिए इस नंम्बर पर (7247230761)