//हरिशंकर पाराशर//
नेटवर्क कटनी। कलेक्टर अवि प्रसाद ने निजी स्कूल संचालकों को मनमानी को रोकने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जांच टीम का गठन किया है। गठित की गई टीम ऐसे स्कूल संचालकों की जांच करेगी जो किसी निर्धारित दुकानों से छात्रों के अभिभावकों को शैक्षणिक सामग्री और गणवेश खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। शिकायतों की जांच कर शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित दोषी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए केंद्रीय प्राधिकरण या प्रादेशिक कार्यालय के आयुक्त को प्रतिवेदन भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई बोर्ड से संबंधित जिले के कुछ स्कूलों और निजी शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से पठन पाठन सामग्री, यूनिफॉर्म सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने बाध्य किए जाने की एक लिखित शिकायत उपभोक्ता हितैषी संगठन ने कलेक्टर प्रसाद से की थी। जिस पर कलेक्टर ने पंजीकृत संस्था के अधिनियम की धारा के तहत प्रस्तुत परिवाद पर कार्रवाई करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा के तहत छात्रों और अभिभावकों को एक उपभोक्ता वर्ग के रूप में स्वीकार कर प्रताड़ित पाए जाने शिकायतों की जांच के लिए अनुविभागीय स्तर पर जांच दल का गठन किया है। टीम का अध्यक्ष एसडीएम को बनाया गया है। जबकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्त्रोत समन्वयक व कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल किए गए है।
कलेक्टर कटनी अवि प्रसाद ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और पंजीकृत संस्थाओं से कहा है कि निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी से संबंधित शिकायत वे जांच दल के समक्ष लिखित रूप से कर सकते हैं। जिनकी जांच गठित दल द्वारा की जाएगी। जिसमें निजी शालाओं, शैक्षणिक संस्थाओं और संबंधित व्यापारियों द्वारा जांच दल को पूरा सहयोग किया जाएगा। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित दोषी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ केंद्रीय प्राधिकरण या प्रादेशिक कार्यालय आयुक्त को आगे की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा।
बतादें कि निजी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अभिभावक एक उपभोक्ता वर्ग है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 16 ऐसे ही उपभोक्ता वर्ग के अधिकारों का संरक्षण करती है, इस वर्ग से अनुचित व्यापारिक व्यवहार या अनुचित पद्धति से किसी माल के विक्रय, उपयोग या प्रदाय के संप्रवर्तन के प्रयोजन को प्रतिबंधित करने के लिए कलेक्टर को जांच करने या कराने की शक्ति है।