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मंगलवार, 2 मई 2023

[कविता लेखन] हाँ मै एक किन्नर हूँ:- अनिता रोहलन

[कविता लेखन] हाँ मै एक किन्नर हूँ:- अनिता रोहलन

अनिता रोहलन, नागौर राजस्थान

न लड़की हूँ, न लड़का हूँ, मै हूँ इस सृष्टि की एक सुन्दर कृति,

समाज की बन्धिशो मे बन्धी मै अर्धनारीश्वर का रूप हूँ,

छक्का,हिजड़ा,किन्नर न जाने क्या क्या नाम मिले मुझे,

मै भी माँ की कोख से जन्मा हूँ फिर क्या दोष है मेरा,

मै भी हूँ इस समाज का एक हिस्सा,

फिर क्यो बना दिया तुमने मुझे अभिशाप,

गुम सा हो गया है मेरा अस्तित्व इन्सानो की भीड़ मे,

मेरे अपने भी पराये हुये जान मेरे वजूद की हकीकत,

बजा बजा के तालिया हैरान,परेशान हो गये है हालात मेरे,

इस समाज के सवालो से परेशान,

आखिर कब तक छुपाये हम खुद का अस्तित्व,

न चाहते हुये भी दफन है,हजारों ख्वाईशे मेरी,

उन गुमनाम गलियों मे शर्मशार कर देता है मुझे समाज के सवाल,

क्या हो रहा है मेरे जज्बातो के साथ,

बेमतलब निकल रहा है मेरे सपनों का जनाजा,

मै हूँ उस समाज की कहानी जो कहने को उच्च विचारो वाला बनता है,

देख मुझे मुंह फेर लेता है,

मै हूँ दर्द,पीड़ा की कहानी,

इस समाज की बन्धिशो से आजाद,

लेकिन फिर भी हूँ मै बदनाम,

हर खुशी के मौके पे देती हूँ मै दुआएं हजार,

फिर भी मै तिरस्कार की भागी बनती हूँ,

चेहरे पे बेहिसाब सूकून रखती हूँ,

मगर भी फिर खुद से अनजान रहती हूँ,

मेरी पहचान को तुम सबने ताली बजाने तक सीमित कर दिया,

आखिर क्यो ?

जिन पन्नो मे मेरे अस्तित्व को धिक्कारा जाता है,

उन पन्नो को मै फाड़ दूँ,

जिस कलम की स्याही से मेरी खिल्ली उड़ाई जाती है,

उस कांच की शीशी को मै तोड़ दूँ,

क्यो जन्म दिया तुमने,जब यह दूनियाँ मुझे फिजूल कहती है,

पेड़_पौधे,जीव _जन्तु,कुछ भी बना देती,

 क्यो बनाया मुझे आधी लड़की आधा लड़का,

मात्र दिखावे के लिए तुम मेरे रक्षक बनते हो,

पीठ पीछे तो तुम मुझे हिजड़ा ही कहते हो,

नही मानते तुम सब मुझे अपनी दूनियाँ का हिस्सा,

पर अब चाहिए मुझे अक्स मेरा सच्चा,

हाँ!हाँ मै एक किन्नर हूँ 

इस समाज में बदनाम,बेईज्ज़त हूँ,

लेकिन स्वार्थ के लिए मैने तुम इन्सानो की तरह अपनो को नही बेचा,

हाँ!मेरा कोई ठिकाना नही है,

लेकिन सबको दुआएं देती हूँ मै नि: स्वार्थ भाव से ,

हाँ!हाँ मै एक किन्नर हूँ ।।