औद्योगिक और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें बढ़ाने के वितरण कंपनी द्वारा नियामक आयोग को दिए गए प्रस्ताव सुनवाई चल रही है। आपत्तिकर्ता ऑनलाइन अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं और बिजली की दरें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं।
//सुनील केवट//
नेटवर्क जबलपुर। कुछ आपत्तिकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान दो टूक कहा है कि दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली का प्रस्ताव ही निरर्थक है, इसलिए इसे सिर से खारिज कर देना चाहिए। क्योंकि टाइम ऑफ डे के कारण शाम पांच बजे के बाद से मिलने वाली बिजली की दर ज्यादा होगी, अतिरिक्त सरचार्ज भी लिया जाएगा।
यह है प्रस्ताव
नए वित्तीय वर्ष में अप्रैल से प्रदेश के लोगों को बिजली 3.86 फीसद महंगी मिल सकती है। मप्र नियामक आयोग ने मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के टैरिफ प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। बिजली कंपनियों ने 2046 करोड़ की भरपाई के लिए दरें बढ़ाने की अनुमति आयोग से मांगी है। आयोग वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए इस टैरिफ पर दावे-आपत्तियां बुलाकर आज 29 जनवरी को जबलपुर की सुनवाई हो रही है। इसके बाद 30 जनवरी को भोपाल और 31 जनवरी को इंदौर में जनसुनवाई होगी।
औपचारिकता रह गई सुनवाई
आपत्तिकर्ता केके अग्रवाल और पीजी नाजपांडे ने कहा कि बिजली की दरें बढ़ाने से पहले जनसुनवाई करना महज एक औपचारिकता रह गई है। कोविड के बाद भी ऑनलाइन सुनवाई ही हो रही है। अग्रवाल ने बताया कि आज तो हद हो गई कि सुनवाई के पूर्व विभाग की ओर से कोई जानकारी तक नहीं दी गई लेकिन, जबकि जितने भी आपत्तिकर्ता हैं सभी को लिंक भेजना चाहिए। विभाग की यह उदासीनता से यह प्रतीत होता है कि सुनवाई महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। जो कि बिजली उपभोक्ताओं के साथ एक छलावा ही है।