//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
नेटवर्क छतरपुर। राजनगर एसडीएम कार्यालय में विगत दो तीन वर्षों से लगातार भू अर्जन की कार्यवाही चल रही है। जिसमें आदिवासी कास्तकारों की जमीनें भू अर्जन की गई और उन को स्वीकृत राशि के एवज में मात्र कुछ ला ख रुपए ही प्राप्त हुए और अधिकारी और संबंधित बाबूओं ने मिलकर यह राशि हड़प ली है। मिली जानकारी के अनुसार टिकरी गांव के आदिवासी मंजा कोंदर के नाम पर रेलवे ने भू अर्जन कर उसकी जमीन की मुआवजा राशि 38 लाख लगभग स्वीकृत हुए थे परंतु राजनगर के पूर्व एसडीएम डीपी द्विवेदी और उनके अधीनस्थ दो बाबू योगेन्द्र सिंह परमार एवं संदीप तिवारी के द्वारा मंजा कोंदर की मृत्यु के उपरांत उसके फर्जी बारिश को बनाकर उसके नाम की स्वीकृत राशि का बंदरबांट किया है। जिसकी शिकायत छतरपुर कलेक्टर से की गई है। इस संबंध में मंजा कोंदर की बहन श्याम बाई जो कि मृत हो चुकी है उसकी पुत्री नरवदिया व उसकी बहू पाना बाई ने इस संबंध में एक शिकायती पत्र एसडीएम को दिया था और उक्त राशि लड्डू आदिवासी के नाम न किए जाने व भुगतान पर रोक लगाने के लिए आग्रह किया था। परंतु अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय के बाबुओं की मिली भगत से उन्होंने लड्डू आदिवसी को मंजा कोंदर का पुत्र दर्शाकर लड्डू आदिवासी के नाम यह राशि उसके खाते में डाल दी और उसे पांच छ: लाख रुपए देकर बाकी राशि का बंदरबांट कर लिया। मंजा कोंदर की बहन श्यामबाई की पुत्री ने इस संबंध में सिविल न्यायालय में केस दायर कर दिया है। उनके वकील बीपी खरे ने बताया कि मंजा कोंदर के कोई भी संतान नहीं थी और न ही उसकी शादी हुई थी। विभाग के लोगाों ने फर्जी वसीयत तैयार कर लड्डू आदिवासी को उसका पुत्र दर्शा दिया। इस खेल में पूर्व एसडीएम डीपी द्विवेदी एवं भू अर्जन में कार्य कर रहे बाबू संदीप तिवारी, एवं योगेन्द्र परमार की भूमिका रही। हालांकि इसकी शिकायत छतरपुर कलेक्टर से कर दी गई है और कलेक्टर ने जांच के आदेश कर दिए हैं। राजनगर एसडीएम कार्यालय में इस घोटाले को लेकर हडकंप मचा हुआ है और इसमें लिप्त बाबू और अधिकारी अच्छे खासे परेशान नजर आ रहे हैं। इस संबंध की शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी की गई है। अब देखना है कि दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर क्या कार्यवाही होती है हालांकि सिविल न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है और अतिशीघ्र इस पर न्यायालय कार्यवाही कर अपना फैसला सुनाएगी। इस संबंध में छतरपुर कलेक्टर ने शिकायत आवेदन पर जांच कराकर कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं दूसरी ओर वकील बीपी खरे ने कहा कि मंजा कोंदर की जमीन की मुआवजा राशि का राजस्व अधिकारियों ने मिलकर लड्डू आदिवासी के नाम डालकर निकाल ली है।