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मंगलवार, 17 दिसंबर 2024

हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश हमारे अंदर भरे, वही सच्चा गुरु:- चिन्मयानंद बापू

//राजेश पाराशर//

नेटवर्क सागर। खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में चल रही श्री राम कथा के दूसरे दिन में पूज्य बापूजी ने कहा कि साधारण मनुष्य कभी गुरु नहीं बन सकता और गुरु यदि है तो फिर उसको मनुष्य रूप में देखना यह अपराध है क्योंकि गुरु साक्षात परमात्मा का स्वरूप होते हैं और यदि हमने किसी को गुरु बनाया है तो वह हमारे लिए परमात्मा का स्वरूप है।

साधु समाज की वंदना करते हुए बापूजी ने कहा कि प्रतिकार का पूर्ण सामर्थ्य और सहन करने की पूर्ण शक्ति जिसके अंदर है वही मनुष्य सच्चे रूप में साधु है।

वंदना प्रकरण के बाद कथा को शिव चरित्र की ओर मोड़ते हुए कहा कि भगवान शिव अपनी पत्नी के साथ उत्तर से दक्षिण की ओर अगस्त ऋषि के यहाँ  श्री राम कथा सुनने के लिए गए।

बापू जी ने कहा कि यदि दिल में प्यास हो तो पानी कितना भी दूर मिले इंसान पहुंच ही जाता है। यदि हमारे दिल में कथा के लिए प्रेम है तो हमारे शहर में कथा कितनी भी दूर हो सुनने वाला व्यक्ति वहां पहुंच ही जाता है। बापूजी ने कहा कि राम कथा हमें सिर्फ सुना ही नहीं है बल्कि राम कथा लहू बनकर हमारे रग रग में दौड़नी चाहिए। भगवान शिव ने राम कथा सुनने के बाद राम दर्शन की मन में लालसा व्यक्त की और उनको भगवान राम का दर्शन भी हुआ। कथा के माध्यम से बापूजी ने कहा कि हम भी कथा सुनने के बाद भगवान की लीलाओं का चिंतन करें, जिससे कि हमारे मन में भी भगवान के दर्शन की लालसा हो और हमें भी भगवत कृपा से भगवान का दर्शन प्राप्त हो। कथा में श्रीमती संगीता डाॅ. सुशील तिवारी महापौर सागर, श्रीमती रचना-गौरव सिरोठिया, श्रीमति शिल्पी- अभिषेक भार्गव, श्रीमति डाॅ. प्रतिभा तिवारी, पारुल साहू पूर्व विधायक, नीरज केशरवानी, अनिल दुबे, लक्ष्मण सिंह, पप्पु तिवारी, चन्दु शुक्ला, संदीप तिवारी, मुख्य यजमान श्रीमती प्रतिभा- डाॅ अनिल तिवारी, शिवशंकर मिश्रा, सह यजमान अशोक उपाध्याय, सीताराम मिश्रा, मुन्ना पटेरिया, कमल तिवारी, राम जी दुबे, अजय श्रीवास्तव, गोलू रिछारिया, राम अवतार पांडे, डाॅ. तरुण बडौनिया, मनोज डेंगरे आदि उपस्थित रहे।

कथा प्रतिदिन खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में दोपहर 02 बजे से शाम 05 बजे तक चल रही है।