श्री राम कथा का पांचवा दिन
//राजेश पाराशर//
नेटवर्क सागर। खेल परिसर के बगल वाले मैदान में चल रही श्री राम कथा के पांचवें दिन बापूजी ने कहा कि भगवान श्री राम विद्या अध्ययन करने के बाद अपने पिता के कार्यों में हाथ बाटने लगे।
बापूजी ने कहा कि एक अच्छे और संस्कारी बच्चे का कर्तव्य है कि अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद अपने पिता के कार्यों में हाथ बटाएं और उसका सहारा बने। यही सच्चे और एक अच्छे पुत्र का धर्म है। बाद में भगवान श्री राम जब विश्वामित्र के साथ गए और उनकी यज्ञ की रक्षा की और जनकपुर की यात्रा के दौरान अहिल्या का उद्धार किया। बापूजी ने कहा कि अहिल्या की गलती भी उसके लिए उसका श्राप नहीं आशीर्वाद के रूप में काम आया। क्योंकि जिन परमात्मा का दर्शन करने के लिए मनुष्य जन्म जन्मांतर तपस्या करता है ऐसे परमात्मा की चरण रज उसको एक भूल से ही प्राप्त हो गई और भगवान दयालु हैं। उन्होंने अहिल्या पर अपनी चरण रज देते हुए उसको श्राप से मुक्ति दिलाई और मुक्त किया। बापू ने बाद में गंगा जी के आगमन की कथा सुनाई और जनकपुर पहुंचकर भगवान ने किस तरह पुष्प वाटिका लीला की और धनुष भंग किया यह कथा भी बापू जी ने सुनाई। पूज्य बापू जी के बेटे राघव ने सीताराम विवाह में राधिका गोरी से भजन गाया। जिस पर सभी श्रद्धालु खूब भाव विभोर होकर नाचे। बापूजी ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है और जब तक मनुष्य के भीतर का अहंकार खत्म नहीं होता तब तक मनुष्य की भक्ति प्रभु को समर्पित नहीं होती। इसलिए भगवान ने जब धनुष भंग किया और माता सीता प्रभु को समर्पित हुई। धूमधाम से भगवान की बारात पंडाल में प्रवेश की और खूब गाने बजाने के साथ भगवान राम का दिव्या विवाह संपन्न हुआ।
कथा में मुख्य रूप से मुख्य यजमान श्रीमति प्रतिभा- अनिल तिवारी, शाखा अध्यक्ष शिवशंकर मिश्रा, सह यजमान अशोक उपाध्याय, डाॅ. अजय तिवारी, सीताराम मिश्रा, मुन्ना पटेरिया, कमल तिवारी, अवध रामजी दुबे, अजय श्रीवास्तव, गोलू रिछारिया, राम अवतार पांडे, डाॅ तरुण बड़ोनिया, श्रीमति नीति- अनिल दुबे, श्रीमति छाया पाण्डे, रीतेष मिश्रा,अरूण दुबे, ए.के.शर्मा, श्यामसुंदर मिश्रा, मधुर पुरोहित, असंख्य दुबे, मनोज डेंगरे आदि उपस्थित रहे।
