समन्वित कृषि प्रणाली एवं कृषक बन्धु चयन प्रक्रिया उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित।
ब्यूरो नेटवर्क टीकमगढ़। कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि काॅलेज में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा मापवा योजनान्तर्गत स्टाफ प्रषिक्षण के माध्यम से टीकमगढ़ जिले के समस्त बरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/ कृषि विकास अधिकारी तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को जिले में समन्वित कृषि प्रणाली/फसल विविधिकरण को कैसे बढ़ावा दिया जाये, जिससे किसानों की आय में शासन की मंशानुसार बृद्धि हो सके।
क्योंकि अक्सर यह देखा गया है कि जिले के किसान परम्परागत फसलें जैसे-खरीफ-उड़द, सोयाबीन तथा रबी में गेहूं आदि फसलों को ही प्राथमिकता देते हैं। जिस कारण कभी-कभी प्राकृतिक आपदा से फसलों को भारी क्षति होती है, परम्परागत फसलों के स्थान पर या आंशिक रकवा पर कृषकों को ऐसी फसलों का चयन करना चाहिये जिनमें प्राकृतिक आपदा के समय कम से कम क्षति हो, जैसे-खरीफ में ज्वार, ग्वार, मूंगफली तथा सब्जियों में जड़ एवं कंद बाली फसलों एवं रबी में सांवा, सरसों, अलसी आदि फसलों को अपनायें तथा प्राकृतिक आपदा के समय होने वाली क्षति की पूर्ति हेतु समन्वित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधता को अपनाना बहुत जरूरी है, ताकि किसान को आजीविका तथा आय में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके और आय का श्रोत निरंतर बना रहे।
ठसके साथ आयोजित कार्यक्रम में सबमिशन आॅन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन आत्मा अंतर्गत शासन द्वारा कृषक बन्धुओं का चयन नये सिरे से किया जाना है के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। जिसकी चयन प्रक्रिया विन्दुबार निम्नानुसार है। नवीन कृषक बन्धु का चयन प्रति दो आवाद ग्राम में से किया जायेगा तथा ग्रामसभा द्वारा प्रस्ताव का अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है। चयन हेतु निम्नतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास तथा आयु सीमा 25 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य होना अनिवार्य है। उपरोक्त विन्दुओं के अतिरिक्त ऐसे कृषक जिन्होंने कृषि विभाग के फार्म स्कूल/अन्य कार्यक्रम अथवा गतिविधि में विशेष किसान (अचिवर कृषक) के रूप में भाग लिया है तो प्रमाण-पत्र संलग्न कर आवेदन करें। साथ ही साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुये दो आवद ग्राम अर्थात जिस पंचायत से कृषक बन्धु का चयन होना है यदि वहां जिस वर्ग की जनसंख्या ज्यादा है तो उस विन्दु को ध्यान में रखकर चयन किया जायेगा तथा शासन की मंशानुसार एवं मापवा/आत्मा योजनाओं (मध्यप्रदेश कृषि में महिलाओं की भागीदारी) दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुये कृषि में महिलाओं की भागीदाारी को सुनिश्चित करने हेतु कृषक बन्धु चयन में 30 प्रतिशत महिलाओं का होना अनिवार्य है। जिससे महिलाओं को कृषि में सशक्त बनाया जा सके और सभी वर्गाें की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।