2 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति का सम्भावित मामला हुआ उजागर....नगर परिषद सवालों के घेरे में....दुकान आवंटन सूची से जुड़ा मामला।
//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। नगर में नगर परिषद द्वारा बस स्टेण्ड पर लगभग 25 और जंगल चौकी के स्थान पर 4 दुकानों का निर्माण कराया गया था , किन्तु आजतक यह ज्ञात नहीं है कि नगर परिषद की इन 29 दुकानों का किराया किसकी तिजोरी में जा रहा है।15.09.2011 को बस स्टेण्ड की 15 और जंगल चौकी की 4 अर्थात 19 दुकानों तथा बस स्टेण्ड की शेष 10 दुकानों की नीलामी 28.08.2014 को नगर परिषद प्रशासन द्वारा कराई गई थी। जिन लोंगो ने नीलामी के दौरान दुकानों को लिया था उनके द्वारा इन दुकानों के एवज में निर्धारित नीलामी राशि जमा किये बिना ही दुकान हस्तांतरित करके किराए पर संचालित कराई जा रही है।
इन दुकानों के निर्माण के पश्चात स्थानीय मध्यम वर्गीय दुकानदारों यही आस थी कि इनमें से एक दुकान हमको भी मिल जाएगी, किन्तु दुकानों की नीलामी के समय यह भी ध्यान नहीं रखा गया की दुकान के क्रेता स्थानीय हैं या नहीं? मध्यम वर्गीय हैं या अमीर? स्वयं दुकान करेंगे या हस्तान्तरित करके मध्यम वर्गीय दुकानदारों से मोटी राशि वसूलेंगे? नियमों को ताक पर रखकर नीलामी करा दी गयी।
दुकान का वास्तविक स्वामी अभी कौन है दुकान संचालक या नगर परिषद नीलामी में शामिल होने मात्र से ही दुकान क्रेता मौज उड़ा रहे हैं नगर परिषद कार्यालय में बोली(पगड़ी)की राशि जमा किये बिना ही दुकान संचालकों से मोटा किराया लेकर रख रहे हैं।
ऐसा नहीं हो सकता कि जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में यह विषय न हो पर जनप्रतिनिधियों ने आज तक इस विषय पर कोई भी चर्चा नहीं की है, लेकिन जब स्थानीय समाजसेवी गौसेवक पत्रकार रविन्द्र जैन रवि के संज्ञान में यह सारा विषय आया तो उन्होनें नगरपरिषद कार्यालय में पदस्थ मुख्य नगर परिषद अधिकारी महोदय मिथलेश गिरी गोस्वामी से इस विषय पर चर्चा कर जानकारी मांगी।
तो उन्होंने बताया कि उपरोक्त 29 दुकानें अभी किसी को भी अधिकृत रूप से आवंटित नहीं हैं। जंगल चौकी की सिर्फ 2 दुकानों का किराया जमा कराया जा रहा है । शेष 2 दुकानदारों से भी मय ब्याज के राशि जमा कराने की कार्यवाही की जाएगी तथा बस स्टैंड की 25 दुकानों का प्रकरण संभागायुक्त कार्यालय सागर में लंबित है नगरीय निकाय के पत्र क्रमांक 157 के माध्यम से नीलामी सम्बन्धी समस्त नस्तियाँ व दस्तावेज दिनाँक-13-02-2014 को आयुक्त कार्यालय सागर भेजे जा चुके हैं।
जिसके निराकरण हेतु मैं स्वयं शीघ्र सागर जा रहा हूँ और इस प्रकरण का निराकरण एक माह के अंदर हो जाएगा।
अब यहाँ मुख्य बात यह है कि दुकानें बनकर तैयार हैं,दुकानों का संचालन हो रहा है, पर दुकानदार अपनी अपनी दुकानों से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं .लेकिन न ही दुकान संचालकों के पास नगर परिषद की कोई लिखित पत्रावली है, और न किसी भी प्रकार की नगरीय निकाय द्वारा अनुमति प्रदान की गई।
फिर आखिर इन दुकानों का वितरण किस आधार पर किया?दुकानदारों को दुकान संचालित करने की अनुमति किसने दी? दुकानदारों से लिया जाने वाला मासिक किराया किसके पास जा रहा है? यदि दुकानों का संचालन अवैद्य हो रहा है तो नगरपरिषद कार्यालय द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्यवाही क्यों नहीं कि गयी।