● मजदूरो को गांव में नही मिल रही मजदूरी...मनरेगा योजना भी बनी मजाक।
//स्वतंत्र टिप्पणीकार - रूपेश जैन//
बक्सवाहा/घुवारा/बड़ामलहरा। शासन प्रशासन चाहे कितने भी दावे करले पर हकीकत कुछ और ही व्यान करती है ऐसी तस्वीरें रोज सामने आ रही है जहाँ क्षेत्रीय लोग बढ़ती बेरोजगारी के चलते अपने परिवार के भरण पोषण के लिए काम की तलाश में पलायन करने को मजबूर है वैसे तो कहा जाता है की बुंदेलखंड के बकस्वाहा में दुनिया का नायाब हीरा निकलने वाला है पर इसी बकस्वाहा के मजदूर मजदूरी के लिए भटक रहे और आसपास के जिलों में मजदूरी करने जा रहे है हाल ही में उपचुनाव होना है क्षेत्र में राजनैतिक सभाओ का दौर जारी है राजनैतिक पार्टियां सभाओ में गरीब मजदूरों के हितों की बात कर खूब बहबहिया बटोर रही है वही इन गरीब मजदूरों की सुध लेने वाला कोई नही
● ताजा मामला।
बुधवार को दोपहर कुछ ऐसे ही मजदूरो से भरा एक ट्रेक्टर दिखा जब उन मजदूरो से बात की तब जो हकीकत सामने आई उसके बाद सरकारें जो राग अलाप रही है और पंचायते जो रोजगार देने की बात कर रही है वो बातें बेईमानी सी साबित हो रही है बकस्वाहा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत मंझगवा के मजदूर एक ट्रेक्टर में भरकर दमोह जिले मजदूरी तलाशने के लिए निकले जब उनसे बात की गई तो मजदूर राम प्रसाद आदिवासी ने बताया पहले हम लोग बाहर मजदूरी के लिए गए थे पर कोरोना संक्रमण फैलने के बाद हम सभी पैदल घर बापिस आ गए और गांव में रहने लगे पर यहां मजदूरी नही मिली इसलिए मजदूरी करने जा रहे वही मजदूर मालती कहती है की मनरेगा योजना में जो पंचायत में काम होते है वो मशीनों से हो जाते है ऐसे में हम मजदूरो के पास मजदूरी नही बची फसल कटाई की मजदूरी भी इस बार बहुत कम है क्योकी फसल ठीक नही तो ज्यादातर किसान फसले नही काट रहे है वही बात करते सुमन रानी की आंखे भर आईं और बोली की हमारे बच्चो को यहाँ पालना मुश्किल हो रहा है ऐसे में न तो इस इलाके में कोई मजदूरी है न कारखाने पंचायतों की मजदूरी का तो सबको पता है जब कभी जिले से अधिकारी आते तो हम लोगो को पंचायत के लोग बुला लेते है
कुछ मजदूरो ने बताया की हम लोग पैदल चल कर बाहर से अपने गांव आये थे अब ऐसे में बाहर जाने का मन नही इसलिए आसपास के जिलों में मजदूरी तलाश रहे है।
