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शनिवार, 31 जुलाई 2021

पृथ्वीपुर। बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य समाधिस्थ मुनि श्री 108 विश्वमूर्ति सागर जी की जन्म स्थली पर होगा ब्रह्मरूपी जी का चातुर्मास।

पृथ्वीपुर(टीकमगढ़)। बुंदेलखंड के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य सनातन श्रमण परम्परा के अनुयायी ब्र.ब्रह्मरूपी आरपी यदुवंशी जैन जी का वर्षायोग (चातुर्मास) पृथ्वीपुर के ग्राम ककावनी में समाधिस्थ मुनि श्री 108 विश्वमूर्ति सागर जी की जन्म स्थली पर हो रहा है ।

बता दे कि ब्रह्मरूपी जी ने अल्प आयु में जिनवाणी को हृदयांगत कर कई जीवो को मांस,मदिरा,सिगरेट,तम्बाखू,गुटखा,तथा कुरीतियों से मुक्त कराया जिन्हें जैन,हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,पारसी इन सब में भेद नही दिखता ।

ऐसे तीर्थंकर नेमिनाथ तथा नारायण कृष्ण के कुल यादव कुल में जन्मे ब्र.ब्रह्मरूपी यदुवंशी जैन जी जिनका जन्म मध्यप्रदेश के ही भिण्ड जिले के मौ नगर नामक कस्बे में हुआ और आज सनातन जैन धर्म के अहिंसा के प्रचार प्रसार हेतु  श्वेतांबर, दिगम्बर,स्थानकवासी,13पंथ,20पंथ,हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,पारसी इन सबको न देखते हुए सिर्फ और सिर्फ अरिहंत का पंथ आगम आत्म पंथ के आधार पर जन जन को संस्कार देकर उन्हें सनातन बनाने तथा जैन युवाओ में उत्साह भरने जैन धर्म के सिद्धांतो को विश्व पटल पर युवाओं के द्रष्टिकोण को एक नई दिशा देने के लिए अपने जीवन को बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य गणाचार्य श्री108 विराग सागर जी महामुनिराज के चरणों मे समर्पित किया है ।

तथा उनका एक ही ध्येय एक ही नारा सारे विश्व मे हो अहिंसा का वीर शासन हमारा ।

ऐसे सम्यक साधक का चातुर्मास पृथ्वीपुर के ककावनी की पावन भूमि पर हो रहा है जहां पर गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद से ब्र.ब्रह्मरूपी यदुवंशी जैन जी के सानिध्य में भव्य नवीन जिन मंदिर का भी निर्माण चल रहा है।

ब्रह्मरूपी यदुवंशी जैन जी ने ग्राम ककावनी को धर्म की नगरी बना रखा है ।उनका कहना है कि यह ग्राम ककावनी की भूमि अत्यंत पावन है जहां से कोई जीव दिगम्बर मुनि हुआ है यह ग्राम ककावनी वह पावन भूमि है जहाँ पर बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य गणाचार्य श्री108 विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य समाधिस्थ मुनि श्री 108 विश्वमूर्ति सागर जी महाराज ने जन्म लिया है। ज्ञात हो कि ग्राम ककावनी में किसी भी सम्यक साधक का यह प्रथम चातुर्मास है ।