//नीलेश विश्वकर्मा//
नोहटा(दमोह)। भगवान का दर्जा दिए जाने वाले डॉक्टर मरीजों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। क्षेत्र का सरकारी अस्पताल सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। वहीं अधिकांश डॉक्टर अस्पताल में समय पर नहीं मिलते। जिससे मरीजों को भटकना पड़ता है
ऐसे में मरीजों को निजी क्लिनिकों में जाने के मजबूरी होती है। लोगों के परेशानी से निजात दिलाने के लिए ना तो कोई जनप्रतिनिधि ना तो कोई समाजसेवी संस्था अति है। और अगर इस तरह की लापरवाही हुई तो निश्चित तोर पर आम लोगों से शासन की उन योजनाओं से भरोसा उठ जाएगा जो चुनाव के समय पर बड़े बड़े वादे का जनता की मदद के लिए वादा करते हैं और जीतने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देते हैं जिसका जीता जागता स्वरूप नोहटा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है।जहा समय होने के बावजूद डॉक्टर्स 3 से 4 घंटे के बाद भी ओपीडी नहीं पहुंचते। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। बरसों से यह परंपरा इस अस्पताल में देखी जा रही है। अनेकों बार शिकायतों के बावजूद इन डॉक्टरों पर ना तो किसी का नियंत्रण है और ना ही अपनी ड्यूटी के प्रति ईमानदारी है। आए दिन चर्चाएं होती हैं कि यह डॉक्टर्स अस्पताल में कम और अपने निजी क्लिनिक में ज्यादा रुचि रखते हैं। लोगों का कहना है कि यह डॉक्टर अपने उच्चाधिकारियों से मिलीभगत कर बेखौफ हो निजी क्लीनिक संचालित करते हैं। लोगों की बात पर सत्यता उस समय नजर आती है जब ऊपर बात करने पर अधिकारी टालमटोल कर बात को घुमाने का प्रयास करते हैं।
• हॉस्पिटल परिसर में डाक्टर के इंतजार में लाइन लगाकर खड़े मरीज।
• अस्पताल में डाक्टर की खाली कुर्सी।
• हाईकोर्ट के निर्देशों की भी नहीं परवाह
हाईकोर्ट ने सभी शासकीय अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों से शपथ पत्र मांगा था कि वह प्राइवेट प्रैक्टिस करते है या नहीं। लेकिन इस नियम से यहां के डॉक्टर बेपरवाह हो निजी क्लीनिकों में अधिक एवं अपने ड्यूटी पर नहीं के बराबर ध्यान देते हैं। इन्हें हाईकोर्ट के नियमों की भी परवाह नहीं होती।