चहकती है, महकती है
ये जिन्दगी बहुत मुस्कुराती है।कभी दुःख देती हैं, तो कभी ख़ुशी देती हैं।
ये जिन्दगी है, जिसे मुस्कुराके जीना है।
वो हर पल मुस्कुराती है
ये धरती एक दुल्हन की तरह सकती और सबरती हैं।
सकून चारो तरफ दुंता फेर रहा है।
सकून तो मिलेगा उस गाली उस मुहल्ले में
जहां आज भी रात में सोने से पहले करते हैं वो ढिंढोरा और जब होता हैं न्याय का होता सबेरा।
वो बसंत की हवा
जब पड़ती है जुल्फों पर
आ जाती हैं मुस्कान
गिरती है जब आंखो पर एक बारिश
कि बो बूंद चहक उड़ता है मेरा मन ।
जब पड़ती है कड़क ठंड
और लेते हैं गर्म चाय की चुस्की
आ जाती हैं मुस्कान।
खुले आसमान में उड़ते पंछियों को देख कर
मिलती हैं ख़ुशी
मन को मिलती हैं ठंडक
ये जिन्दगी तू भी इन पंछी की तरह
खुल के जीना सीख
फिर मुस्कुरा उठेगा तेरा जीवन।
हर पल हर लम्हे को
जी ऐसे जैसे मिले न कभी
दुबारा।
चहकती है महकती है
ये जिन्दगी बहुत मुस्कुराती है।