• मुख्य वक्ताओं पंकज बोरकर व डाॅ अजय भारद्वाज ने विषय पर दिए सार्थक व्याख्यान
ब्यूरो छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर में भारत सरकार के राजीव गांधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रबंधन संस्थान, नागपुर के तत्वाधान में "बौद्धिक संपदा अधिकार: पेटेंट एवं डिज़ाइन प्रक्रिया" विषय पर एक दिवसीय सारगर्भित कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस बेविनार में बड़ी संख्या में शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन सहभागिता कर विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला के मीडिया कॉर्डिनेटर डॉ एस पी जैन ने बताया कि उद्घाटन सत्र की शुरुआत करते हुए कार्यशाला के संयोजक डॉ बी एस परमार ने ऑनलाइन तथा ऑफलाइन रूप से जुड़े हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस कार्यशाला के मुख्य संरक्षक तथा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो टी आर थापक ने आईपीआर के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए इसके महत्व को समझाया। कार्यशाला के संरक्षक तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ जे पी मिश्र ने बौद्धिक संपदा को बाजारवाद से जोड़ते हुए इसके अंतर्संबंधों को रेखांकित किया तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके महत्व को विस्तृत रूप से बताया। कार्यशाला के विषय का प्रवर्तन करते हुए डॉ विभा वासुदेव ने बताया कि भारत देश युवाओं का देश है और पेटेंट तथा डिज़ाइन के क्षेत्र में इन्हें आगे आने की जरूरत है।
प्रथम सत्र में आर जी एन आई आई पी नागपुर से डॉ पंकज बोरकर को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने पेटेंट तथा डिज़ाइन में अंतर बताते हुए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट फाइल करने की विस्तृत प्रक्रिया को समझाया।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल से मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ ए के भारद्वाज ने अपने विस्तृत तथा सारगर्भित उदबोधन में विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए बताया कि नए विचार किस तरह से आय का स्रोत हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईपीआर भारत सरकार की स्टार्ट अप इंडिया तथा मेक इन इंडिया जैसी अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं को सफल बनाने में किस तरह कारगर हो सकता है।
इस कार्यशाला में ऑफलाइन, ऑनलाइन तथा यूट्यूब पर किए गए लाइव प्रसारण के माध्यम से बहुत बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के अंत में डॉ एच सी नायक के संयोजन में ओपन सत्र आयोजित किया गया।जिसके तहत प्रतिभागियों के प्रश्न एवं विचारों पर चर्चा की गई। कार्यशाला के अंत में डॉ पी के खरे ने कार्यशाला में सहभागिता निभाने वाले सभी प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित किया। कार्यशाला का संचालन डॉ के बी अहिरवार एवं प्रो आर डी अहिरवार ने किया। इस कार्यशाला के आयोजन में प्रो डी के प्रजापति का विशेष सहयोग रहा।