ब्यूरो। कार्यशाला में 10 राज्यों से पर्यावरणविद ,जीव व प्रकृति प्रेमियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ धर्मेंद्र कुमार, संयोजक राष्ट्रीय जंगल बचाओ अभियान ने की गई एवं कार्यक्रम का संचालन अनुराग बिश्नोई ने किया।
विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर श्री संजय कुमार जो कि राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है, गौरैया के सरंक्षण मैं विगत 15 साल से कार्य कर रहे हैं इस दौरान इनकी 11 पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है गौरतलब है कि श्री संजय कुमार प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो,सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पटना में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं विश्व गौरैया दिवस पर हमें उनका उद्बोधन सुनने को मिला,संजय जी ने बताया कि विलुप्त होती हुई गौरैया को हम किस तरह बचा सकते हैं, इंसान की गलत प्रवृत्ति के कारण ही आज गोरैया का अस्तित्व और जीवन खतरे में है दिन प्रतिदिन घटती हुई संख्या चिंता का विषय है मनुष्य अपनी सुविधानुसार प्रकृति से खिलवाड़ कर दोहन की प्रवृति को अपनाते हुए पेड़ों को काट रहा है।
पक्षियों का आशियाना छीनकर अपने लिए बड़ी बड़ी बिल्डिंग, इमारत बना रहा है, इन बेजुबान पशु पक्षियों के लिए गर्मियों में तो परिंडे लगाकर पानी की सुविधा कर देते हैं लेकिन ठंड में भी उनके लिए इसी तरह सुविधाएं करनी चाहिए क्योंकि जैसे इंसान की प्रवृत्ति होती है कि उसको गर्मी में भी उतनी ही जरूरत होती है पानी की जितनी सर्दीयो में होती है अतः हम सभी को मिलकर अपने में बदलाव लाना होगा तभी हम पक्षियों को अपने पास देख पाएंगे व उनकी चहचहाहट सुन पाएंगे ।
मीटिंग के अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे जिससे पक्षियों को रहने के लिए जगह मिल सके,साथ ही प्रकृति के सिंगार करना होगा, मनुष्य को दोहन की प्रवति को छोड़ना होगा क्योंकि जितना अधिकार प्रकृति पर मनुष्य को है उतना ही बेजुबान पशु पक्षियों को भी है।
दिलीप चटवाल जी ने भी अपने विचार रखे और उन्होंने बताया कि हमें अपनी सुविधानुसार पक्षियों को खाने के लिए दाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए जिससे उनको अलग-अलग जगह भटकना ना पड़े और उनको एक जगह पर ही भोजन की सुविधा हो जाए।
रामबाबू तिवारी जी ने भी अपने विचार रखें और उन्होंने बताया की विश्व गौरैया दिवस पर हम संकल्पित करे की हमारे दैनिक जीवन में और व्यवहार मैं बदलाव करते हुए जीव जंतु और पशु पक्षियों के लिए भोजन,पानी की व्यवस्था में योगदान कर सकते है।
अनुराग बिश्नोई ने बताया कि 10 राज्यों से जुड़े 25 पर्यावरण योद्धाओं ने अपने अपने विचार रखे और विश्व गौरैया दिवस पर हम किस तरह से पक्षियों के लिए दाने पानी की व्यवस्था कर सकते हैं विचार व्यक्त किए मीटिंग में उपस्थित कई पर्यावरण प्रेमियों ने तो गत्तों के बॉक्स से पक्षियों के लिए घर बनाए और उनको पेड़ों पर लटकाया और कुछ पर्यावरण योद्धाओं ने पक्षियों के पानी के लिए मिट्टी के बर्तन और परिंडे बनाने का भी कार्य किया, मीटिंग में उपस्थित,राजेश यादव,नेपाल सिंह,रामकुमार बघेल,निक्की शर्मा,स्नेह सिंह,बलजीत बिश्नोई, डॉ ओपी चौधरी, डॉ अश्वनी कुमार दुबे, विद्या झां, हेमलता बिश्नोई, मिथिलेश शर्मा,उषा मिश्रा,पूनम खन्ना,लीला पवार, विजय विश्वकर्मा,राकेश बिश्नोई,विकास विश्नोई,राकेश दुबे,रघुराज प्रताप,अमित कुमार,रूद्र कुमार,रोहित गुप्ता, मनमोहन त्रिपाठी,मनोज डागा,जितेंद्र मिश्रा,निर्भय सिंह उपस्थित रहें सभी का आभार व्यक्त उषा मिश्रा के द्वारा किया गया।