बढ़ती डीजल की किल्लत के साथ बदले मौसम के मिजाज
अंशुल असाटी
बक्सवाहा/ पिछले लंबे समय से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही है फसल की बोनी के साथ ही खाद की किल्लत और कालाबाजारी ने गरीब किसानों का बजट बिगाड़ा कालाबाजारी के चलते किसानों ने खाद की बोरी 2000 रुपये तक मे खरीदी वही अघोषित बिजली कटौती से सिंचाई में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा अब किसानों की फसल पक कर तैयार खड़ी हैं लेकिन पिछले तीन दिनों से बंद पड़े पेट्रोल पम्पों की बजह से हारबेस्टर और थ्रेशर बंद पड़े हैं पक कर खड़ी फसलो को निवालों के लिए तैयार करने के लिए खेतो की मेड़ पर खड़े हारबेस्टर व थ्रेशर ईंधन के इंतजार में है पक कर खड़ी फसल पर छाए काले बादल और डीजल की किल्लत ने किसानों की नींद हराम कर दी है
अन्य जिलों से डीजल लाने को मजबूर किसान
बक्सवाहा में डीजल सपलाई करने वाले पेट्रोल पम्पों में पिछले तीन दिनों से ताले पड़े हुए है और किसान डीजल के इंतजाम में दर दर भटक रहे है मजबूर किसान बदलते मौसम का रुख देखते हुए लम्बी दूरी तय कर सागर और दमोह जिले से डीजल की जुगाड़ कर रहा है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब दमोह और सागर जिले में डीजल मिल रहा है तो बक्सवाहा में आखिर डीजल की किल्लत क्यो है
