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सोमवार, 11 जुलाई 2022

भारत में बढ़ती आबादी समस्याओं का मुख्य कारण है:- राजीव शुक्ला

देश में बढ़ती आबादी कई समस्याओं का कारण है और इस कारण को विगत कई वर्षों से हमारे देश की सरकारे अकारण ही नजरअंदाज करके इस दिशा में आज तक कोई प्रयास नहीं कर सके जबकि देश को जनसंख्या नियंत्रण कानून की अब बेहद आवश्यकता है क्योंकि जिस तरह से देश में विस्फोटक तरीके से आबादी का विस्तार हो रहा है उससे न सिर्फ सामाजिक ताना-बाना अनियंत्रित हो रहा है बल्कि संसाधनों की कमी के चलते व शिक्षा के अभाव में अपराध व अत्याचार भी पनप रहे हैं ।

1990 में वैश्विक जनसंख्या मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व जनसंख्या दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है जो कि हर वर्ष 11 जुलाई को औपचारिकताओं के साथ संपन्न हो जाता है , पर हम अगर इसके उद्देश्यों की पूर्ति की तरफ जाए तो जनसंख्या मुद्दों जैसे परिवार नियोजन, लिंग समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य, मानव अधिकार आदि के महत्व के बारे में और बढ़ती जनसंख्या के उत्पन्न समस्याओं के प्रति आम जनता को जागरूक करना इसका उद्देश्य है लेकिन हमारे देश में अशिक्षा वा  दूरदर्शिता की कमी बढ़ती जनसंख्या के मूल कारण हैं ।

भारत विकास में पीछे पर आबादी के लिहाज से जनसंख्या के मामले में विकसित राष्ट्र चाइना से हम आगे निकलने की लगभग तैयारी में है, भारत की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या के 17.7% है जबकि कुल भूमि क्षेत्र विश्व के कुल क्षेत्रफल से 2.4% भाग हमारे हिस्से में है , खाद्य और कृषि संगठन (एफ ए ओ) के अनुसार भारत की लगभग 14.8% आबादी कुपोषित है, भारत में 5 साल से कम उम्र के 69 फ़ीसदी बच्चों की मौत कुपोषण के कारण होती है कुपोषण के अंतनिश्चित कारणों में से एक गरीबी है और गरीबी उन्मूलन कोसों दूर है, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक शहरीकरण संभावनाओं अनुसार देश में मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की संख्या 10.40 करोड़ या भारत की कुल जनसंख्या का 9% होने का अनुमान है , झुग्गी झोपड़ी के प्रत्येक 10 में से 6 घरों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है भारत में 63% झुग्गी झोपड़ी घर या तो बिना जल निकासी कनेक्शन की है या खुले  नालों से जुड़े हैं, दुनिया के विकसित देशों की तरह भारत में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिलता इतना ही नहीं उन्हें जो भोजन मिलता  है उस में पोषक तत्वों की बेहद कमी होती है ।

देश  में प्रदूषण, खाद्य मिलावट, ग्लोबल वार्मिंग, खतरनाक ई-कचरा, प्रदूषित वायु जल, उपयोगी खेत की कमी, प्राकृतिक संसाधनों का अधिक उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों की कमी, वनों की कटाई, जंगलों का विनाश, वन्यजीव और मनुष्यों के बीच बढ़ते टकराव, ईंधन की बढ़ती खपत, कभी अकाल कभी बाढ़, शुद्ध हवा और पानी की कमी, पर्यावरण का क्षरण, बढ़ते कंक्रीट के जंगल, बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई, जिंदगी के लिए संघर्ष और बढ़ती गंभीर बीमारियां इन सभी समस्याओं का कारण बढ़ती जनसंख्या ही है , जिसके चलते हमारे समाज के कई असहाय लोग अधिकादिख बीमारियों, विक्षिप्त लोग, असहाय बच्चे सड़कों पर कूड़े में खराब भोजन के ढेर से खाना ढुढ़ते नजर आ जाते हैं जो हमारे लिए बड़े ही शर्म की बात है, जनसंख्या वृद्धि के कारण मलिन बस्तियों, गंदा वातावरण, अशिक्षा, गरीबी, अपर्याप्त पोषण,  बारिश की कमी ,आर्थिक असमानता जैसी गंभीर समस्याएं भी पनप रही है, ऐसी खराब परिस्थितियों में बच्चों के जीवन का संघर्ष बचपन से ही शुरू हो जाता है ।

आज हमारे देश में अगर किसी कानून की सर्वाधिक आवश्यकता है तो वह जनसंख्या नियंत्रण कानून जिसके लिए कड़े प्रावधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है जिस दिशा में हमारी सरकारों को प्रयास करने की आवश्यकता है वरना आने वाला समय और भी अधिक विस्फोटक व खतरनाक बनकर देश में पहले से ही व्याप्त कई समस्याओं के ऊपर यह एक विकराल समस्या देश की एकता अखंडता में भी बाधक साबित होगी, आज विश्व जनसंख्या दिवस पर सिर्फ इसे एक अन्य दिवशों की तरह इतिश्री करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि गंभीर सोच के साथ इस दिशा में कड़े कानून के सहित प्रावधान लाने की आवश्यकता है वरना इस देश का भगवान ही मालिक है।