Translate

शनिवार, 3 सितंबर 2022

अभिकर्ता रीढ़ की हड्डी है, इसे कमजोर ना करें:- राजीव शुक्ला

   राजीव शुक्ला (अधिमान्य पत्रकार)

लेख - अभिकर्ता किसी भी बीमा संस्थान की एक रीड की हड्डी होता है अगर अभिकर्ता जमीनी स्तर में धूप हो या छांव, ठंड हो या बरसात किन्ही भी हालातों का सामना करके परिश्रम और अपने गट्स के द्वारा बीमा संस्थान के लिए कार्य करते हुए बीमा लाकर व्यवसाय देने का कार्य करता है जिससे ही बीमा संस्थान की हर गतिविधियों का संचालन होता है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज उसी रीढ़ की हड्डी को कमजोर करने के जो प्रयास किए जा रहे हैं उससे सिर्फ और सिर्फ बीमा संस्थानों को गर्त में ले जाने की योजना मात्र है।

आज जिस तरह से वातानुकूलित कक्षों में बैठकर अभिकर्ताओं के हितों की रक्षा न कर के बल्कि और आर्थिक शोषण के तहत उनके पारितोषिक में कमी लाना व कठोर नियम बनाकर पारदर्शिता के नाम पर अभी कर्ताओं को अपने कार्यों को करने के लिए इन वातानुकूलित कक्षों में बैठे अधिकारियों के द्वारा थोपे गए वह नियम जो शायद धरातल पर आकर एक चुनौती होती है जिसका उन्हें अंदाजा ही नहीं है, क्योंकि व्यवसाय लाने का कार्य तो अभीकर्ता करता है और उसे पता होता है कि वह किन चुनौतियों का सामना करके बीमा करके बीमा कंपनी को व्यवसाय देने का कार्य करता है, दुर्भाग्य यह है कि उन अभीकर्ताओं से बगैर जाने समझे और उनकी समीक्षा के बगैर ही ऐसे लोग नियम बना देते हैं जिन्होंने कभी फील्ड में आकर काम ही नहीं किया, कहावत है "जिनके पांव न फटी बिमाई, वो क्या जाने पीर पराई" कहावत को चरितार्थ करते यह अधिकारी जिन्हें संस्थान चलाने का अधिकार है वह अपने अधिकारों का दुरुपयोग ही कर रहे हैं क्योंकि नियम समान होने चाहिए सिर्फ एक तरफा शोषण उचित नहीं, कभी आपने अपनी सुख-सुविधाओं व अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बढ़ रहे वेतन वृद्धि तथा अन्य मामलों पर भी नजर डाला है..? 

            शायद नहीं, इन संस्थानों के वातानुकूलित कक्षों में बैठे हुए अधिकारी सिर्फ अभीकर्ताओ में फूट डालकर उन्हें विखंडित करते हुए नियमों का डंडा चलाना जानते हैं, लेकिन अब अभी कर्ताओं को अपने हकों की प्राप्ति हेतु एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है वरना बेतुके  नियम और बेपरवाह अधिकारी बीमा संस्थानों को ले डूबेंगे।

बीमा संस्थानों को अगर मजबूत करना है तो हमें अपने रीढ़ की हड्डी अभीकर्ता को मजबूत करना होगा, शासन प्रशासन में बैठे लोगों को अमेरिका व यूरोप की तर्ज में काम ना करते हुए यहां के हालातों और जमीनी हकीकत को परखते हुए कार्य करने की आवश्यकता है।

  "बीमा आग्रह की विषयवस्तु जरूर है" लेकिन उस आग्रह को करने वाला भी एक अभिकर्ता ही होता है, आज भी बीमा नहीं बिकता बल्कि अभिकर्ता का विश्वास व व्यवहार बिकता है, एक अभिकर्ता एक बीमे के लिए दसों बार ग्राहक से संपर्क स्थापित करके सफलता अर्जित करता है और इस दौरान उसके वक्त एवं आने- जाने में हुए पेट्रोल खर्च इत्यादि का अगर अंदाजा लगाया जाए तो मिलने वाला कमीशन भी ओछा पड़ जाएगा, बेहतर प्रशासक वही होता है जो वह इन सभी चीजों का मूल्यांकन करना जानता हो, सिर्फ मैं और मेरा काम ठीक बाकी सब बेकार की तर्ज पर अगर प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रवाहित किया जाएगा तो नीचे से जमीन खिसकने में देर नहीं लगेगी, इसलिए जरूरी है कि काम करने वा कराने की कला भी प्रशासनिक प्रक्रिया में शामिल करें तभी आप अपने आप को एक कुशल प्रशासक के तौर पर स्थापित कर पाएंगे।

प्रशासनिक प्रक्रिया हो या राजनीतिक दल या अन्य संगठन व समूह यह  तभी फेल होते हैं जब अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की कीमत नहीं समझते अच्छों अच्छों को हमने ढेर होते हुए देखा है जिन्होंने अपने कद को बढ़ाने में सहायक रहे कार्यकर्ता की कीमत नहीं समझी, वही हाल आज बीमा कंपनियों का है जिनके द्वारा जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले आधार स्तंभ वह अभिकर्ता जो बीमा संस्थानों की रीढ़ की हड्डी है को कमजोर करने का जो प्रयास किया जा रहा है उससे आने वाले समय में निश्चित रूप से ऐसे बीमा संस्थान कमजोर ही हो होते जाएंगे जो इनकी पूछ परख करना नहीं जानते, अतः सोए हुए बीमा संस्थानों के वातानुकूलित कक्षों में बैठे आप सभी महानुभाव जागो और आंखें खोल कर जमीनी हकीकत को परखने का धरातल पर आकर प्रयास करें नहीं तो अभीकर्ताओं के अभिशप्त से आप भस्म हो जाएंगे ।