इस समाज के नियम और शर्ते अलग है
तुम्हे गुणवान साबित करने के लिए,
तुम्हे गोरा होना होगा,
तुम्हारे बाल लम्बे होने चाहिए,
तुम्हे पढ़ा लिखा होना होगा,
चूल्हे चौके का भी ज्ञान हो,
लम्बी भी हो,
चूप रहने वाली हो,
सुशील,शान्त,शर्मीली स्वभाव की हो,
तुम्हारे वस्त्र ही तुम्हारे चरित्र को स्पष्ट करते हो,
जितनी नजरे झुकी होगी उतनी ही तुम संस्कारी होगी,
तुम्हारी हंसी का भी एक पैमाना होगा,
उसी के हिसाब से तुम मुस्कुराना,
आखिर क्या ? इन सब मानक रेखाओं से तुम्हे सही साबित किया जाता है तुम किसी भी मानक की मोहताज नही हो तुम अपने आप मे विशेष हो ।
तुम आत्मनिर्भर हो,
तुम जीवन्त हो,
तुम स्वछन्द हो,
तुम अंमुक्त हो,
तुम जागरूक हो,
तुम खुद अपने आप मे एक पूरा इतिहास,वर्तमान,भविष्य हो
तुम्हे अपनी पहचान अपने नाम से बनानी है न कि किसी के साबित किये गये मानक रेखाओं से ।।
लेखन- अनिता रोहलन "आराध्यापरी "
जिला _ नागौर (राजस्थान )