पंचकल्याणक के पांचवे दिन भगवान को केवल ज्ञान की प्राप्ति।
//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। नगर में आयोजित श्री मज्जिनेन्द्र शान्तिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्वशान्ति महायज्ञ के के चतुर्थ दिवस सांध्यकालीन आरती के उपरांत प्रतिष्ठाचार्य पण्डित श्री नन्हें भाई जी सागर के शान्तिनाथ जी की वैराग्य भावना को लेकर मंगल प्रवचन हुए। तदुपरान्त श्रीमती दीपा जैन बड़ामलहरा एवं सौधर्मेंद्र श्री पवन कुमार जैन मबई वालों ने सौधर्मेन्द्र परिवार की ओर से सभी को 29 फरवरी के रथोत्सव में आगमन हेतु आमंत्रित किया।फिर चन्दनबाला बालिका मण्डल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। बालिका मण्डल एवं महिलामण्डल की सदस्याओं द्वारा नाटिका का मंचन किया गया।
27 फरवरी गुरुवार को प्रातः अभिषेक,शान्तिधारा,पूजन विधान सानन्द सम्पन्न हुआ।
शान्तिधारा करने का सौभाग्य श्री शांतिकुमार जी,एवं अशोक जैन शिक्षक कुटौरा वालों को प्राप्त हुआ।
मुनिश्री विरंजनसागर जी ससंघ के पादप्रक्षालन का अवसर श्री सनत कुमार,सुरेन्द्र, नितेन्द्र जैन कुटौरा वालों ने प्राप्त हुआ।मुनिसंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्री प्रमोद जैन(गट्टू),प्रथम कुमार,प्रबल जैन बड़ामलहरा वालों को मिला।इस आयोजन में प्रमोद जी (गट्टू)बड़ामलहरा परिवार ने द्वितीय बार मुनिश्री को शास्त्र प्रदान करने का अवसर प्राप्त किया है।
मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा-कि आज मुनि शान्तिनाथ जी की आयु 1000 वर्ष थी आज उन्होंने राजा सुमित के घर आहार ग्रहण किये व आज के ही दिन देवों ने समवसरण की रचना की ।और सभी जीवों के प्रश्नों का समाधान समवसरण में हुआ। समवसरण के असीम वैभव का वर्णन मुनिश्री ने अपने मुखारविंद से जन समुदाय को बतलाया।
मुनि शान्तिकुमार को आहार देने का अवसर प्रदान किया गया। राज सुमित और श्रीमती सुशीला-श्री अनिल कुमार जी चौधरी ने प्रथम आहार देने का सुअवसर प्राप्त किया।
अनेक लोगों ने शुध्द वस्त्र धारण करके मुनि शान्ति कुमार जी की आहारचर्या कराई।और शेष लोगों ने आहारदान की अनुमोदना की।
द्रोणप्रान्तीय नवयुवक संघ के उपाध्यक्ष रविन्द्र जैन रवि ने समस्त जानकारी देते बताया कि-तीर्थंकर मुनिश्री शांतिकुमार की आहारचर्या के बाद मुनिश्री विरंजनसागर जी ससंघ की आहारचर्या सम्पन्न हुई।मुनिश्री विरंजनसागर जी के आहार कराने का सौभाग्य श्री सेठ नरेंद्र कुमार जैन घुवारा को प्राप्त हुआ।
आगामी विशेष कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 28 फरवरी शुक्रवार को रात्रि 8 बजे से विराट राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित होगा।
तथा 29 फरवरी शनिवार को प्रातःकाल अति प्राचीन,अतिशय युक्त प्रतिमा श्री शान्तिनाथ जी का महामस्तकाभिषेक होगा।और दोपहर में रथ-परिक्रमा होगी।
पाण्डाल में समवसरण की रचना की गई भगवान शांतिनाथ का समवसरण लगा जिसमें अनेकानेक जीवों ने उपस्थित होकर दिव्यध्वनि का श्रवण कर आत्मोद्धार करने का मार्ग जाना।
समवसरण का प्रथम दर्शन करने का सुअवसर श्री राजेन्द्र कुमार,राजीव कुमार जी बमनौरा को मिला।
समवसरण में श्रावक श्रेष्ठी बनकर प्रथम प्रश्न करने का सुअवसर श्री कोमल चन्द्रजी,प्रवीण कुमार जी संगीतकार समर्रा हाल टीकमगढ़ वालों ने प्राप्त किया। रेवतीरानी महिला मण्डल को समवसरण की 46 दीपकों से प्रथम आरती करने का सौभाग्य मिला।
आज की सन्ध्याकालीन प्रथम आरती श्री सनत कुमार,पुष्पेन्द्र कुमार, भूपेंद्र कुमार,सचिन कुमार (माता-पिता)परिवार, एवं द्वितीय आरती श्री कमल कुमार जी सपरिवार रजवांस वालों को करने का सौभाग्य मिला।
प्रतिष्ठाचार्य श्री नन्हेंभाई जी सागर,उदयचंद्र जी सागर,शुभम् जी बड़ामलहरा व अन्य विद्वानों के सहयोग व संगीतकार प्रवीण जैन टीकमगढ़ और कलाकार चक्रेश जैन सोजना द्वारा कार्यक्रम को सुनियोजित रूप से संचालित कराया जा रहा है। कमेटी के सभी सदस्य कार्यक्रम को बेहतर और व्यवस्थित करने में निरंतर कार्यरत रहते हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय समाज एवं सभी के सहयोग से ही पंचकल्याणक जैसे बृहत कार्यक्रम सम्पन्न होते हैं।घुवारा के इस पंचकल्याणक में सभी का यथायोग्य सहयोग मिल रहा है।
