नेटवर्क मंडला/उज्जैन। मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा 16 अगस्त को माहिष्मती घाट, मंडला में श्रीकृष्ण पर्व हलधर महोत्सव एवं लीलाधारी प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। माँ नर्मदा की पावन तटभूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। समापन समारोह में सांसद फगन सिंह कुलस्ते, नगर पालिका अध्यक्ष विनोद कछवाहा, जय दत्त झा, कलेक्टर सोमेश मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कुमट, अपर कलेक्टर राजेन्द्र कुमार सिंह एवं एसडीएम सोनल सिडाम सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।
इस अवसर पर बुंदेली रंगमंच आर्ट एंड कल्चर सोसायटी, छतरपुर के कलाकारों ने बुंदेलखंड का प्रसिद्ध बरेदी लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
क्या है बरेदी लोकनृत्य?
बरेदी नृत्य बुंदेलखंड का पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा से लेकर अगहन माह तक नृत्य-गान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य मुख्यतः गोप-ग्वालों की परंपरा से जुड़ा है, जिसमें कलाकार कतारबद्ध होकर ढोलक, नगाड़ा और मंजीरे की थाप पर तालबद्ध गति से नृत्य करते हैं।
इसमें गाए जाने वाले गीतों में भगवान कृष्ण, गोवर्धन पूजा, लोक जीवन और ग्रामीण संस्कृति का वर्णन होता है। नृत्य के दौरान कलाकार रंग-बिरंगे परिधान, पगड़ी और परंपरागत वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुति देते हैं, जो दर्शकों को उत्सव और आस्था दोनों का अनुभव कराता है।
बरेदी नृत्य को बुंदेलखंड की पहचान माना जाता है और यह सामूहिकता, भाईचारे और उत्सवधर्मिता का प्रतीक है।
इसी कड़ी में 17 अगस्त को उज्जैन के सप्तऋषि आश्रम में भी संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में छतरपुर की टीम ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। यहाँ भी दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति का भरपूर स्वागत किया।
कलाकारों में निर्देशक रवि अहिरवार के साथ लखन अहिरवार, रविन्द्र अहिरवार, दीपक कुशवाहा, सुरेश अहिरवार, ब्रजभान अहिरवार, अवधेश कोंदर, पंकज रैकवार, योगेश, दीपांश, शिल्पा रैकवार, नेहा अनुरागी, प्रिंसी गोस्वामी, जानवी कुशवाहा, भूमिका, सूरज महोबिया, ओम प्रकाश, कन्हैयालाल विश्वकर्मा और कमलकांत प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि बुंदेलखंड की लोकधारा केवल अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है।
