//रमेश अग्रवाल//
नेटवर्क पन्ना। पूरी दुनिया मे जहां एक ओर कोरोना का कोहराम मचा हुआ वहीं दूसरी ओर भारतीय मूल की महिलाओं को वैज्ञानिक आदेशों से भी ज्यादा आस्था पर भरोसा है शायद यही कारण है कि महिलाएं कोरोना से बचाव के बज़ाय खुद ही निकल पड़ी अपने पतियों की रक्षा करने।
दरसअल हिन्दू परम्परा के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को हर शादीशुदा महिला अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए उपवास रखती जिससे पति को लंबी आयु प्राप्त होती है लेक़िन इस व्रत के कुछ नियम है जिनका पालन करना काफ़ी अहम माना जाता है इन्हीं नियमों के अंतर्गत महिलाएं बरगद के पेड़ के चक्कर लगाती है व एक दूसरे को सिंदूर लगा कर सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती है। भारत मे यह त्योंहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है चूंकि भारत इस वर्ष वैश्विक त्रासदी की चपेट में है इसलिए लोगों को सलाह दी जा रहीं है। कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन अवश्य करें लेक़िन वो कहते है न एक पत्नी के लिए उसके पति की रक्षा उसके व्रत से ज़्यादा और कोई नही करता है इसी भ्रम में महिलाओं ने खुद की ज़िंदगी को दांव पर लगाते हुए सोशल डिस्टेनसिंग को भूल कर, मास्क को घरों में छोड़कर वट वृक्ष की पूजा की।
वट सावित्री की पूजा करने पहुंची महिलाओं ने पन्ना जिले के नगर व गांवो के कई स्थानों में पूजा की रस्में पूरी की साथ ही व्रत का पाठ कर ग़रीब सौभाग्यवती महिलाओं को सुहाग की सामग्री भी दान दी। जिसके बाद इस वर्ष महिलाओं ने भगवान में आस्था दिखाते हुए माता सावित्री से कोरोना संकट को हरने की भी कामना की।
