//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के अधिष्ठाता व जिनवाणी के अनमोल रत्न,लक्ष्मी सरस्वती के पुत्र पंडित श्री रतनलाल जी बैनाड़ा आगरा निवासी का दिनाँक- 16/08/2020 दिन रविवार सुबह लगभग 9:30 बजे धर्मध्यान पूर्वक आकस्मिक देहपरिवर्तन हो गया । जो लगभग 79 वर्ष के थे।
पंडित जी जैनागम के ख्यातिप्राप्त विद्वान् थे, व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अनन्य भक्त थे। आगरा के उद्योगपतियों में इनके परिवार नाम सर्वविदित है । इन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा व मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से सन् -1996 से श्रमण संस्कृति संस्थान(आचार्य ज्ञानसागर छात्रावास) सांगानेर जयपुर के अधिष्ठाता के पद पर आसीन रहकर निर्बाध रूप से विद्यार्थियों को जैनदर्शन का अध्यापन कार्य कराते थे।
साथ ही सम्पूर्ण भारत वर्ष में यह स्वयं व इनके 500 से अधिक शिष्य शिविरों का आयोजन करते थे। पंडित जी द्वारा जिज्ञासा समाधान आदि अनेक पुस्तकों का लेखन व संपादन कार्य किया गया।इनका एक प्रसिद्ध कार्यक्रम पाठशाला जिनवाणी व पारस चैनल पर प्रसारित होता था।
जैन जगत में यह श्रेष्ठ विद्वान् व दान दातार श्रेष्ठि के रूप में ख्याति प्राप्त थे। यह लक्ष्मी और सरस्वती पुत्र थे ।इनकी मधुर आवाज,सरल व्यवहार और असीम ज्ञान लोगों के मन को मोहित कर लेता था। इनको बोलती जिनवाणी के नाम से लोग जानते थे क्योंकि यह जिनवाणी के ज्ञान के भंडार थे ।
ऐसे पंडित जी के देहावसान की चर्चा सम्पूर्ण देश में हवा की तरह फैल गयी और इनके द्वारा शिक्षा ग्रहण करने वाले सांगानेर संस्थान के पूर्व स्नातकों के साथ जैन समाज के साधु संतों, व श्रावकों को यह खबर बेहद दुखद रही । अनेक स्थानों पर आदरणीय पंडित जी को श्रद्धांजलि दी गयी घुवारा नगर के श्री दिगम्बर जैन पद्मप्रभु मन्दिर में सायं 7:30 बजे श्रमण संस्कृति संस्थान के पूर्व छात्रों द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन समाज जन के साथ किया गया। जिसमें सभी ने अपने अपने शब्दों,संस्मरणों,व भावनाओं को व्यक्त कर पण्डित जी को श्रद्धाजंलि समर्पित की। सभा में धनीराम जी भौयरा,पं.रमेश चंद्र जी,निर्मल जी बारौ,सेठ नवीन कुमार जी,संतोष जी पाटन, निर्मल जी,अमरचंद्र जी भौयरा, सुनील जी बारौ,राजाराम जी शिक्षक,रविन्द्र जैन रवि पत्रकार,मनोज जी शास्त्री,अजय सिमरिया,सचिन्द्र चंदेरिया,नरेन्द्र मबई,सुनील शास्त्री,कमल जी मबई, अजयकांत जी, अनीश जैन,अभिषेक'अभि',आदि ने पंडित जी को याद करते हुए उनकी सद्गति की कामना करते हुए, उनके परिजन व समाजजन व उनके शिष्यों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने हेतु ईश्वर से कामना करते हुए मन्त्र जाप किया । यह भले ही भौतिक शरीर को त्यागकर चले गए किन्तु इनके द्वारा दिया गया ज्ञान,आचरण,संस्कार लोगों के हृदय में सदियों तक जीवित रहेगा । इनके आचरण पर चलने का प्रयत्न करना ही इनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।