//शानू अली//
घुवारा(छतरपुर)। जनपद क्षेत्र में ग्रामीण विकास, जनकल्याणकारी योजनाऐं व मनरेगा योजना में धांधली चल रही है। गांव में रोजगार न मिलनें से ग्रामीण महानगरों की ओर पलायन कर रहे है। ग्राम पंचायत कुंवरपुराकलां के ग्रामीण भी शासकीय योजनाओं का लाभ पानें के लिए दर दर भटक रहे हैं। स्वच्छ भारत भारत अभियान व प्रधानमंत्री
ग्राम पंचायत कुंवरपुरा के विकास हेतु चालू पंचवर्षीय में शासकीय मद से लाखों रुपये आहरण किए गए है वावजूद इसके गांव की तरक्की ढांक के तीन पांत वाली कहावत हो रही है। जन कल्याणकारी योजनाओं में भी पात्र हितग्राही बंचित हैं। पंचायत में स्वच्छ भारत योजना अंतर्गत शौचालय निर्माण कराये गये हैं परंतु अनेक ग्रामीण उनका भुकतान पानें के लिए भटक रहे है। गज्जू यादव निवासी मलपुरा बताता है कि, वह 70 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है काफी प्रयास के बाद भी उसका नाम पेंशन योजना में नहीं जोडा गया। बब्लू यादव बताते है कि, गांव वह प्रधानमंत्री आवास योजना की पत्रता रखता है लेकिन आवास नहीं मिला। सरकार ने मनरेगा योजना अंतर्गत ग्रामीणों को गांव में काम देने की नीति बनाई है पंचायत द्वारा उसके परिवार को काम नहीं दिया गया। भागचंद्र यादव के घर स्वच्छ भारत योजना के तहत उससे अपने खर्चे पर शौचलय बनाया है। भुक्तान प्रक्रिया के तहत पंचायत सचिव निर्माण कार्य की फोटो भी ले गया लेकिन भुकतान उसके खाते में नहीं आया। इसी प्रकार बंदू यादव बीरेंद्र यादव ने भी घर में शौचालय बनवाया है निर्माण के 2 वर्ष बीतनें पर भी उसके खाते में राशि नहीं आई।
• लाभ का धंधा साबित हो रहे ग्रेवियन स्ट्रेक्चर।
जल स्तर को बढनें के उद्देश्य से सरकार ने नदी नालों पर ग्रेवियन स्ट्रेक्चर बनाने की योजना तैयार के है। योजना अंतर्गत मनरेगा योजना से वि.खं. की अनेक ग्राम पंचायतों में ग्रेवियन स्ट्रेक्चर निर्माण कार्य स्वीकृत हुए है। पंचायत कर्मियो ने संरचना निर्माण को आडे हाँथों लिया है और निर्माण कार्य में तय मापदंडों का ख्याल नहीं रखा। निर्माण ऐजेंसी ग्राम पंचायत को संरचना निर्माण लाभ का धंधा सिद्ध हो रही है। तकनीकी टीम निर्माण स्थल पर जाकर इनकी गुणबत्ता और तकनीकी मापदंडों की सही सही जांच करें तो निर्माण कार्य में एक बडा घोटाला उजागर हो सकता है। बताया जाता है कि, बीती पंचवर्षीय व चालू पंचवर्षीय में जल स्तर बढाने के उद्देश्य से मनरेगा मद से बोल्डर चेकडेम का निर्माण कराया है। निर्माण ऐजेसी बोल्डर चेकडेम तोडकर या उन्हीं पत्थरों को ग्रेवियन स्ट्रेक्चर का रूप देकर सरकार को ठग रहे है। बताते है कि, ग्राम पंचायत कुंवरपुरा कलां में सिलारों नाला 10 नग, खैरी नाला 8 नग, अमरनाला 10 नग, कुलरयाऊ नाला 10 नग, कारीहार की नरैया व गडरयरा नाला, मौनतेल नाला पर एक एक बोल्डर चेकडेम निर्माण कराया है। निर्माण कार्य पर मनरेगा योजना से लाखों रुपये व्यय किए गये। चालू वर्ष में मनरेगा मद से 7.26 लाख रुपये ग्रेवियन स्ट्रेक्चर पर खर्च होना प्रस्तावित है। ग्रामीण बताते है कि, कारीहार की नरैया पर बोलडर चेक डेम तोडकर उन पत्थरों का उपयोग ग्रेवियन स्ट्रेचर निर्माण में किया जा रहा है। यह मामला अकेले ग्राम पंचायत कुवंरपुरा का ही नहीं बल्कि अन्य जगह भी इसी प्रकार यह कार्य हो रहे हैं।
• सूदूर सडक व सीमेंट कंक्रीट सडक निर्माण में भी धांधली
ग्राम पंचायत कुंवरपुराकला में प्रधानमंत्री ग्राम सडक से बरियापुरा तक सूदूर ग्राम संपर्क सडक का काम प्रगतिरत है। ग्रामीणों का आरोप है कि, निर्माण ऐजेंसी काम में नियमों की अनदेखी कर रही है। पंचायत, अमलता की नरैया से मिट्टी उठाकर गुणबत्ताहीन निर्माण करा रहे है। बताते है कि, 25 जून 2019 को ट्रांसफार्मर से बब्लू यादव के घर तक 6.69 लाख रुपये लाख रुपये की लागत से पंचपनमेश्वर मद से सीमेंट कंक्रीट सडक स्वीकृत हुई है। निर्माण ऐजेंसी ने तकनीकी मापदंड की अनदेखी कर आधी अधूरी सडक बनाई है। निर्माण कार्य पर पंचायत ने 2लाख से अधिक मजदूरी पर खर्च दिखाया और शेष रकम मटेरियल खरीदी में खर्च की गई है।
