//रूपेश जैन//
ब्यूरो नेटवर्क। कहते हैं कि व्यक्ति को अपने जीवन में कठनाइयों सामना करना ही पड़ता है. मगर जब चुनौती बड़ी हो तो मंजिल की राह में भी कठिनाई आती है लेकिन जो व्यक्ति इन कठनाइयों का निडरता से सामना करें तो उसके लिए कठिन से कठिन मंजिल भी मिल ही जाती है।
ठीक इसी प्रकार की कठिन परिस्थितियों का सामना बुंदेलखंड के एक छोटे से कस्बे में गरीब किसान के घर जन्मे एक पुत्र ने किया है. जिन्होंने अपने संघर्षमय जीवन में कठनाईयों सामना किया और मुकाम हासिल किया जिसके बाद उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सेवायें प्रदान की और अब वह व्यक्तित्व डीपी दुवेदी छतरपुर जिले के बिजावर में अनुविभागीय अधिकारी के रूप में पदस्थ होकर सेवायें प्रदान कर रहे हैं।
• यह है संघर्षमय कहानी।
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ग्राम में एक गरीब किसान के घर 01 नवंबर 1961 को जन्में डीपी दुवेदी की कहानी अत्यधिक संघर्ष रहित है, जो वयां करते हुए बताते हैं कि मैंने खुद ही हल चलाया और खेतीबाड़ी की. तथा मुझे ठीक तरह से याद है दिवाली की रात्रि को उस समय पूरी रात गांव में लाइट रहती थी तो फसल की अच्छी पैदावार के उद्देश्य से मैने खुद रात-रात भर खेत की सिंचाई की एवं प्रातः उठकर दैनिक क्रियाकलाप के बाद पढ़ाई को भरपूर समय दिया. क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थितियां ठीक नहीं होने के कारण मुझे किसी भी चुनौती का सामना करना आवश्यक था।
• इन विभिन्न क्षेत्रों में प्रदान कर चुके हैं अपनी सेवाएं।
अपनी मेहनत के बलबूते पर डीपी दुवेदी की प्रथम नोकरी ग्राम सेवक के रूप में लगीं जिसके बाद लगातार मेहनत करने पर पंजाब नेशनल बैंक में कैशियर के पद पर पदस्थ हुए लेकिन मंशा अनुरूप कार्य ना होने पर, उसके बाद पोस्टऑफिस में असिस्टेंट के पद पर कार्य किया जिसके बाद सर्वे ऑफ इंडिया में जबलपुर में असिस्टेंट सर्वेयर के पद पर भी कार्य किया। लेकिन जीवन में एक गुरु बनने की इक्छा शक्ति ने मोड़ बदल दिया और शिक्षक के रूप में सेवायें प्रदान की जिसके बाद दृढ़ संकल्पित श्री दुवेदी ने अथक मेहनत के बाद MPPSC की परीक्षा उत्तीर्ण की और सर्वप्रथम नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हुये।
• युवाओं के लिए संदेश।
श्री दुवेदी ने कहा किसी भी स्टूडेंट्स को अपने जीवन में अपनी परिस्थितियों का आंकलन करके हार नहीं मानना चाहिए. क्योंकि जीवन में असंभव कुछ भी नहीं है जरूरत है तो सिर्फ मेहनत और निडरता की।