//आशीष चौरसिया//
बक्सवाहा(छतरपुर)। बक्स्वाहा के जंगल को कटने से बचाने व बक्सवाहा के जंगलों में मिले पाषाण कालीन शैल चित्रो को तुरंत संरक्षित कर इन्हें विश्व स्मारक घोषित कराने के उद्देश्य से बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के बैनर तले छतरपुर से बक्स्वाहा तक पांच दिवसीय साईकिल यात्रा को हीरा खनन प्रभावित गांव में विरोध और स्वागत दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
जिस क्रम में आज साइकिल यात्रा बक्सवाहा क्षेत्र के ग्राम तेरियामार पहुंची।
जिस बीच बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के प्रवक्ता अमित भटनागर ने बताया कि हीरा खनन प्रभावित गांव कसेरा, शाहपुरा, बीरमपुरा, तेईयामार, कसेरा में अधिकतर लोग यात्रा का स्वागत कर रहे हैं और जंगल को बचाने के पक्ष में खड़े है, वही कंपनी समर्थित कुछ लोग काले झंडे दिखा रहे हैं।
तथा इस दौरान साईकिल यात्रा के आज चौथे दिन अमित भटनागर, भोपाल के शरद सिंह कुमरे, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश यादव, बिहार से पर्यावरण बचाओ अभियान के कोर कमेटी सदस्य चंदन यादव, जबलपुर के नीसू मालवीय, इंदौर के बीनू बघेल, धार से सुनीता कलमे एवं आयुष रावत तथा बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के प्रमुख सदस्य बहादुर आदिवासी, भगतराम तिवारी, अलकेश आदिवासी, हिसबी राजपूत, बब्लू कुशवाहा, बालादीन पटेल, देवीदीन कुशवाह, देशराज आदिवासी, देबेन्द्र आदिवासी, जगदीश कुशवाह, दुलीचंद आदिवासी, रवि आदिवासी, जगदीश कुशवाहा, राहुल अहिरवार, फूलचंद आदिवासी सहित दो दर्जन साईकिल यात्री सहभागी रहे।