सच्चा मानव वो होता है जो अपने से पहले सामने वाले के दुःख को और दर्द को समझता:- बागेश्वर धाम सरकार
//आशीष मिश्रा//
बमीठा(छतरपुर)। श्री बागेश्वर धाम सिद्ध पीठ आश्रम में विश्व शांति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में पूज्य संत श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज के पुण्य आयोजकत्व में पूज्य शान्तिदूत धर्मरत्न श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के मुखारविंद से प्रथम बार श्रीमद भागवत कथा का आयोजन 03 से 09 सितम्बर 2021 तक प्रतिदिन श्री बागेश्वर धाम सिद्ध पीठ ग्राम- गढ़ा, पोस्ट - गंज, जिला- छतरपुर, मध्यप्रदेश में दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक किया जा रहा है।
श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज श्री ने पुतना उद्धार, कृष्ण रुक्मिणी विवाह एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। कथा के षष्ठम दिवस पर भक्तों ने महाराज जी के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया।
श्रीमद भागवत कथा के षष्ठम दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।
पूज्य श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज ने कथा पंडाल में बैठे सभी भक्तों को भजन " पत्ता पत्ता डाली डाली मेरी श्याम वसदा," श्रवण कराया।
पूज्य श्री देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरूआत में कहा कि जो संत महात्मा हम लोगों की सेवा करते है हम लोग उस तरफ कभी ध्यान नहीं देते है हम बड़े स्वार्थी है अपना दुःख निकलवा कर निकल जाते है। हम हमेशा अपने बारे में सोचते है सामने वाले के बारे नहीं सोचते है और यही संसार का स्वार्थ भी है हम जब बात करेंगे हमारा काम निकल जाये जय राम जी की ये हम लोगो का स्वाभाव बन चुका है।
महाराज श्री ने बताया की लेकिन सच्चा मानव वो होता है जो अपने से पहले सामने वाले के दुःख को और दर्द को समझता है की हमारे वहां जाने से इस समय उनको कोई परेशानी न हो ये ध्यान जो रखे सही मांयने में वो मानव कहलाने योग्य है। अपने आराध्य में और अपने गुरु में अगर आपकी सच्ची निष्ठां है तो इस ब्रह्माण्ड में कोई भी आपका कुछ नहीं कर पायेगा इसलिए अपने धर्म के साथ खड़े रहो।
पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज जी ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि वे त्रेता युग में ऋषि - मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से की गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है। जितना समय हम इस दुनिया को देते हैं, उसका 5% भी यदि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाएं तो भगवान की कृपा निश्चित मिलेगी। पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि गोपियों ने श्री कृष्ण को पाने के लिए त्याग किया परंतु हम चाहते हैं कि हमें भगवान बिना कुछ किये ही मिल जाये, जो की असम्भव है। महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं राजन जो इस कथा को सुनता हैं उसे भगवान के रसमय स्वरूप का दर्शन होता हैं। उसके अंदर से काम हटकर श्याम के प्रति प्रेम जाग्रत होता हैं। जब भगवान प्रकट हुए तो गोपियों ने भगवान से 3 प्रकार के प्राणियों के विषय में पूछा। 1 . एक व्यक्ति वो हैं जो प्रेम करने वाले से प्रेम करता हैं। 2 . दूसरा व्यक्ति वो हैं जो सबसे प्रेम करता हैं चाहे उससे कोई करे या न करे। 3 . तीसरे प्रकार का प्राणी प्रेम करने वाले से कोई सम्बन्ध नही रखता और न करने वाले से तो कोई संबंध हैं ही नही। आप इन तीनो में कोनसे व्यक्ति की श्रेणियों में आते हो? भगवान ने कहा की गोपियों! जो प्रेम करने वाले के लिए प्रेम करता हैं वहां प्रेम नही हैं वहां स्वार्थ झलकता हैं। केवल व्यापर हैं वहां। आपने किसी को प्रेम किया और आपने उसे प्रेम किया। ये बस स्वार्थ हैं। दूसरे प्रकार के प्राणियों के बारे में आपने पूछा वो हैं माता-पिता, गुरुजन। संतान भले ही अपने माता-पिता के , गुरुदेव के प्रति प्रेम हो या न हो। लेकिन माता-पिता और गुरु के मन में पुत्र के प्रति हमेशा कल्याण की भावना बनी रहती हैं। लेकिन तीसरे प्रकार के व्यक्ति के बारे में आपने कहा की ये किसी से प्रेम नही करते तो इनके 4 लक्षण होते हैं- आत्माराम- जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता हैं। पूर्ण काम- संसार के सब भोग पड़े हैं लेकिन तृप्त हैं। किसी तरह की कोई इच्छा नहीं हैं। कृतघ्न – जो किसी के उपकार को नहीं मानता हैं। गुरुद्रोही- जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हैं। श्री कृष्ण कहते हैं की गोपियों इनमे से मैं कोई भी नही हूँ। मैं तो तुम्हारे जन्म जन्म का ऋणियां हूँ। सबके कर्जे को मैं उतार सकता हूँ पर तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। तुम प्रेम की ध्वजा हो। संसार में जब-जब प्रेम की गाथा गाई जाएगी वहां पर तुम्हे अवश्य याद किया जायेगा।
श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस द्वारिका लीला, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, व्यास पूजन पूर्णाहुति का वृतांत सुनाया जाएगा।