//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
घुवारा(छतरपुर)। घुवारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्वकर्मा पूजा के साथ निकाली गई भाग शोभा यात्रा अबार माता प्रांगण मैं कार्यक्रम विश्वकर्मा पूजन किया गया तत्पश्चात अबार माता मैं पूजन हवन पूजा अर्चना के साथ भक्तजनों ने हवन किया और रहली में शामिल होकर विश्वकर्मा भगवान की शोभा यात्रा निकाली गई अबार माता प्रांगण से लेकर नगरपालिका तिगड्डा बस स्टैंड से होती हुई पुलिस चौकी कुटौरा रोड़ मैन बस्ती और लोगों ने अपने अपने दीवारों पर रंगोली सजा कर विश्वकर्मा भगवान की आरती की तत्पश्चात पुनः अबार माता प्रांगण में समापन किया गया मध्य रात्रि में कीर्तन भजन का आयोजन किया गया जहां पर लोगों ने आरती की और प्रसाद पाकर धर्म लाभ लिया
विश्वकर्मा पूजा को पूरे भारत में आस्था और निष्ठा के साथ मनाया जाता है श्रमिक भगवान विश्वकर्मा का त्यौहार मनाते हैं कहा जाता है शिल्पकार कारीगर और श्रमिक भगवान विश्वकर्मा का त्यौहार मनाते हैं कहा जाता है कि ब्रह्मा के पुत्र विश्वकर्मा ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया था विश्वकर्मा को देवताओं के महलों का वास्तुकार भी भी कहा जाता है इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है विश्वकर्मा दो शब्दों से विश्व संसार या ब्राह्मड और कर्म निर्माता से मिलकर बना है इसलिए विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है दुनिया का निर्माण कराने वाला
• ब्राह्मण्ड के निर्माता हे भगवान विश्वकर्मा।
विश्वकर्मा शिल्प शास्त्र के अविष्कारक हैं और सर्वश्रेष्ठ ज्ञाता माने जाते हैं उन्होंने विश्व के प्राचीनतम तकनीकी ग्रंथों की रचना की थी इन ग्रंथों में ना केवल भवन वास्तु बिधा रथ आदि बहनों के निर्माण बल्कि विभिन्न रत्नों के प्रभाव व उपयोग अधिक का भी विवरण है माना जाता है की उन्होंने ही देवताओं के विमानों की रचना की भगवान विश्वकर्मा को ऋग्वेद में ब्रह्मांड पृथ्वी और स्वर्ग निर्माता के रूप में वर्णित किया गया है