//विन्द्रावन विश्वकर्मा//
नेटवर्क छतरपुर। जिला पंचायत छतरपुर में पंचायत निधि की राशि 22 लाख 60 हजार रुपए का गवन किए जाने का मामला वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भावना वालिंबे के समय हुआ था। इस मामले में एकाउंट अफसर गौरव खरे एवं कमलाकांत खरे एवं शिखरचन्द्र जैन एवं उज्जवल सिन्हा को पुलिस ने आरोपी बनाया था। परंतु वास्तविकता यह है कि जिला पंचायत के एकाउंटेंट कमलाकांत खरे के पास से दो चैकें गायब हुई थीं जिसकी शिकायत कमलाकांत खरे ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी भावना वालिंबे से की उन्होंने इसकी रिपोर्ट कराने के लिए कमलाकांत को सिटी कोतवाली भेजा। कमलाकांत खरे ने सिटी कोतवाली में चैक गुम होने की शिकायत की एवं भारतीय स्टेट बैंक की एडीबी शाखा में सूचना दी कि जिला पंचायत से चैकें गुम हो गई है चैकों का भुगतान न किया जाए। परंतु बैंक अधिकारियों ने बिना हस्ताक्षर प्रमाणित होने पर भी उसका भुगतान कर दिया।
एक चैक उज्जवल सिन्हा ने 14 लाख 60 हजार रुपए की काटी और दूसरी चैक स्वयं 8 लाख की हस्तांतरित कर आहरण की। मजेदार बात ये है कि इस कांड का मास्टर माइंड उज्जवल सिन्हा ने जिला पंचायत से चैक गायब कर शिखरचन्द्र जैन के नाम से 22 लाख 60 हजार रुपए की चैक काटकर एससी जैन को दे दी। और फिर उनसे दो चैकें लेकर यह सारी रकम अपने नाम ले ली।
परंतु इस कांड में पुलिस ने बैंक अधिकारियों को कहीं मुलजिम नहीं बनाया और न ही जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी भावना वालिंबे को आरोपी बनाया। साथ ही एकांउंट अफसर गौरव खरे को भी इससे मुक्त कर दिया गया। बेचारा बाबू कमलाकांत खरे जो कि चैकबुक अपने पास रखता था और उसे डाक द्वारा जब चैक मिली उसमें पहले से ही दो चैकें फटी हुई थीं। जिसकी जांच भी जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी भावना वालिंबे ने कराई जिसमें कमलाकांत खरे निर्दोश पाया गया।
परंतु पुलिस के द्वारा शिखर चन्द्र जैन और कमलाकांत को मुलजिम बनाया गया। इस कांड के मास्टर माइंड उज्जवल सिन्हा ने हाईकोर्ट में जमानत लगाने के पहले 14 लाख 60 हजार रुपए कोर्ट में जमा किए साथ की शिखर चन्द्र जैन ने भी 8 लाख रुपए कोर्ट में जमा कर दिए इस प्रकार शासन को होने वाला नुकसान नहीं हुआ। परंतु एक परिवार जो कि नौकरी के सहारे अपने परिवार को चलाता रहा उसे छतरपुर न्यायालय ने सात वर्ष की सजा कर दी। अब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन है।