प्लास्टिक के कप में चाय की चुस्की हो सकती है जानलेवा
रूपेश जैन बक्सवाहा(छतरपुर)|चाय की चुस्कियां लेने वाले दीवानों की संख्या लाखों में है वही किराना व्यापारी नीलेश ने बताया कि लगभग नगर एवं क्षेत्र में 200किलो चाय की खपत होती है लोग लगभग 1 दिन में 5 ग्राम चाय पीता है नगर में लगभग हर माह ₹50000 चाय का व्यापार किया जाता है लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 70 फ़ीसदी लोग अभी भी प्लास्टिक के कप अथवा डिस्पोजल में चाय पीते हैं जो सेहत के लिए खतरनाक है और पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है डॉक्टर्स की मानें तो प्लास्टिक की कप में गर्म चाय का लगातार सेवन करने से किडनी और लीवर के कैंसर की आशंका बढ़ जाती है|इसका विकल्प मिट्टी के कुल्हड़ और पेपर मत हो सकते हैं लेकिन यह अपेक्षाकृत महंगे होने के कारण दुकानदार इसका इस्तेमाल करने से बचते हैं और हमें इस खतरे की ओर धकेल देते हैं कैंसर का खतरा पर्यावरण को नुकसान मेट्रो सेमिन के कारण कैंसर की आशंका काफी बढ़ जाती है जब कि अन्य केमिकल के कारण हारमोनल इन बैलेंस अल्सर और किडनी तथा लीवर से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है प्लास्टिक मटीरियल में जब गर्म पदार्थ डाला जाता है तो मेट्रो सेमिन सहित कई प्रकार के केमिकल गर्म पदार्थ में धुल जाते हैं इससे कैंसर की संभावना बढ़ जाती है इसमें जो अंदर मोम का लेप किया जाता है वह गर्म चाय डालते ही घुल कर शरीर में पहुंच जाता है इस से लीवर और किडनी डैमेज होने की आशंका रहती है प्लास्टिक के कप नष्ट नहीं होती हैं इसमें जब नालों या नलियों में फेंक दिया जाता है तो बारिश में इन्हें के कारण नालिया चोक हो जाती हैं और जलभराव का कारण बनती है। इस तरह है नुकसानदायक नगर में चाय की छोटी बड़ी लगभग 30 दुकानें है ज्यादातर दुकानों में प्लास्टिक के कप में ही चाय दी जाती है ग्राहकों की जागरूकता की वजह से कुछ लोग कागज के कप रखने लगे हैं डॉ देवेंद्र जैन ने बताया कि चाय पीने पर मेट्रो सेमिन विस्सिफनोल ए, वर्ड इथाइल डक्किसन नामक केमिकल हमारे शरीर में पहुंचते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक है बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह खतरा अधिक बढ़ जाता है और मनुष्य के समझने की शक्ति भी कम होती है।