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सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

प्रत्याशी चयन पर निर्भर हो सकती है भाजपा की जीत


भाजपा व कांग्रेस में मोर्चा बंदी प्रारंभ


संवाददाता हर्षित जैन पाटन(जबलपुर)|  पाटन चुनावी शंखनाद के बाद एक बार फिर पाटन विधानसभा क्षेत्र राजनैतिक गतिविधियो से सरोवर होता जा रहा है। और अब चुनाव मैदान में उतरने प्रत्याशी ताल ठोकने तैयार हो रहे हैं। यद्यपि मतदान तिथि तो घोषित हो गई है और प्रशासनिक तैयारियां भी प्रारंभ हो गई है लेकिन भाजपाइयो कांग्रेसियों की निगाह चुनावी टिकटर्थी की ओर लगी है वैसे कांग्रेस की ऒर से वर्तमान विधायक नीलेश अवस्थी का नाम लगभग तय है । जैसा कि उल्लेख है की पाटन विधानसभा क्षेत्र पैंतालीस साल तक कांग्रेस के कब्जा में रहा है आजादी के बाद प्रथम 1951 के चुनाव में पाटन विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 87 था और सामान्य सीट से कांग्रेस के ठाकुर नेक नारायण सिंह विजई रहे। 1957 के चुनाव में पाटन क्षेत्र 92 नंबर में आ गया और सीट एस टी के खाते में चली गई तब कांग्रेस के ही देवा देवी ने बाजी मारी। 1962 के चुनाव में पाटन विधानसभा क्षेत्र का क्रमांक 175 हो गया ।और सुरक्षित सीट से श्री नारायण प्रसाद चौधरी विजई रहे। 1967 के चुनाव में पाटन विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 173 हो गया और सुरक्षित इस सीट से प्रथम महिला विधायक बनी आशा लता। 1972 में विधानसभा चुनाव में पाटन सुरक्षित सीट से जबलपुर के मोती लाल सोनकर विजई रहे। जबकि 1977 के जनता लहर में भी कांग्रेस की श्री पृथ्वी सिंह विजई रही। 1980 के चुनाव में पाटन नगर का भाग्य चमका जब कांग्रेस के ही भगवत प्रसाद गुरु ने बाजी मारी । 1985 का विधानसभा चुनाव फिर जबलपुर की झोली में चला गया जब कांग्रेस के श्री प्रिय दर्शन जीते। जबकि 1990 के चुनाव में भी जबलपुर की कल्याणी पांडे कसमकास चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीती । 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पंडित रामनरेश त्रिपाठी ने गढ़ तोड़ा । 1998 में जनता दल के बाबू सोबरन सिंह विधायक बने। 2003 के चुनाव में फिर से सोबरन सिंह कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित हुए और उन्होंने फिर जीत दर्ज की। 2008 के विधानसभा चुनाव में पाटन विधानसभा का परिसीमन हो गया जिसका लाभ भाजपा को मिल गया । औरश्री अजय विश्नोई चुनाव जीते ।जबकि 2013 के चुनाव में कांग्रेस फिर आ गई और श्री नीलेश अवस्थी ने जीत दर्ज कराई अब 2018 का चुनाव काफी दिलचस्प लग रहा है भाजपा की चुनावी रणनीति अब कटंगी मझौली की ओर बढ़ती जा रही है और पाटन का इलाका सुना दिखाई पड़ रहा है जबकि कांग्रेस की गूंज सभी दिशाओं से सुनाई पड़ रही है कांग्रेस की ओर से वर्तमान विधायक श्री नीलेश अवस्थी का ही प्रथम नंबर लगा है और भाजपा में कई चेहरे है भाजपा में टिकट पाने वालों की लंबी कतार है देखते हैं किसकी किस्मत चमकती है हाल में हुए भाजपा के कथित आकलन सर्वे ने उसकी नींद हराम कर दी है क्योंकि पूरे प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर है भाजपा के 15 वर्षों के कार्यकाल से लोग ऊब गए हैं और भी बदलाव के फेर में है। दरअसल पाटन का अधिकांश वोटर ग्रामीण क्षेत्रों से आता है वो ही विधानसभा का रास्ता तय करते हैं यद्यपि शासन ने किसानों के हितो में बेहद योजनाएं बनाई लेकिन दलालों का कथित अफसरों ने इन योजनाओं को धूल चटा दी इसके साथ ही भाजपा का संगठन भी बेहद कमजोर रहा है। और कांग्रेस सत्ता हीन रहते हुए उसके हाथों में गेंद जाती दिखाई पड़ रही है। अगर भाजपा ने प्रत्याशी चयन में सूझ बूझ का परिचय नहीं दिया तो संभव कुछ भी नहीं है क्योंकि चुनाव मतदान के लिए भी लंबी तारीख है कुछ भी हो सकता है। पाटन का इतिहास रहा है कि जातीय समीकरण का ढिंढोरा जरूर पीटा जाता है लेकिन परिणाम कुछ भी हो जाता है ।क्योंकि भाजपा व कांग्रेस ने जातीयता पर कई बार खेल खेला लेकिन परिणाम कुछ और ही आते रहे जबलपुर में आए राहुल गांधी से कांग्रेसियों में उत्साह तो है लेकिन वह कितनी वोटों में तब्दील होगा यह समय ही बताएगा ।इसके साथ ही मौजूदा विधायक की कथित विकास रैली भी सोय कांग्रेसियों को जगाने के लिए पपर्याप्त है ।लेकिन भाजपा की ओर से कोई विशेष उत्साह नहीं दिखाई पड़ रहा है चुनावी घमासान नवरात्रि के बाद से दिखाई पड़ेगा तब तक प्रत्याशियों के चेहरे भी सामने आ जाएंगे तब कुछ निर्णय की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।|