जलसंकट से जूझते हुये क्षेत्र को अब तक न मिल सका निजात।
बकस्वाहा मे जल संकट की खासी कमी देखी जा रही है जहां पर अभी अप्रैल का माह शुरू ही हुआ है कि दिनों-दिन बढ़ती गर्मी के साथ ही साथ भीषण जल संकट ने भी अपने कडक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं हालात संपूर्ण जनपद क्षेत्र के अलावा नगर में तो और भी बदतर बने हुए हैं।
जल संकट से जूझते जनपद बक्सवाहा में इन दिनों प्रमुखतः से देखा जाए तो इससे निपटने का मुख्य सहारा पानी के टैंकर हैं। लोग रोज अपनी जल संबंधी जरूरतो की पूर्ति करने के लिए 50 से ₹100 का पानी लेने के लिए मजबूर होते हैं तो वहीं इसके अलावा नगर में चालीस सरकारी नलकूप है जिनमे लगभग मात्र चौदह चालू हालत में है तथा इन नलकूपो के अलावा कूएं भी एक छोटा-मोटा सहारा बने हुए हैं।
नगर में जल की पूर्ति के लिए वरदान स्वरूप तालाब भी बने हुए हैं जो कि एक तालाब नगर में स्थित है जिसका जल दिनों दिन सूख कर जवाब देता जा रहा है तो बावजूद इसके दो किलोमीटर दूर भदभदा डेम जिसका निर्माण कार्य 378.30 की लागत से करवाया गया कि जिससे आने वाले समय में नयी पाईप लाइन के जरिए नगर मे पानी की सप्लाई की जायेगी अतः वह डेम तो अब लगभग पूर्णतः ही सूख चुका है।
यहां जल संकट से निपटने के लिए समय-समय पर शासन प्रशासन द्वारा विभिन्न योजनाएं भी चलायी गई उसी क्रम में लगभग बारह साल पहले एक करोड़ आठ लाख की लागत से जलावर्धन योजना के तहत नगर के वार्ड क्रमांक 13 हरिजन बस्ती इलाके में पानी की पूर्ति के लिए एक टंकी भी बनवाई गई जो आज तक चालू नही हुई जो आज भी केवल एक शोपीस गार्ड की तरह खडी हुई है। इसके पश्चात कुछ दिनों पहले लगभग तेरह करोड की लागत से पूर्ण होने वाली नल जल योजना भी चलाई गई जिसमें भी खास ढील के साथ ही नगर की सडको पर गड्ढे खोदकर उनको पूर्णतः ना भरने जैसी लापरवाही देखने को मिल रही है।
लेकिन इसके अलावा किराये के टैकर से कुंओ मे जल भरवाकर पाइप लाइन के जरिए जल की पूर्ति भी की जा रही है। अतः इससे निपटने के लिए मेरे द्वारा और भी अन्य कार्य किये जायेगे।
कडोरो रूपये की योजनाओ का बन चुका है मजाक बाबजूद इसके चल रहे है निर्माण कार्य।
//रूपेश जैन//
बकस्वाहा(छतरपुर)। जल जीवन का एक ऐसा आधार जिसके बिना जीवन ना के बराबर है इस बात को हम और आप भी भली ढंग से जानते हैं कि जल हमारी प्रमुख जरूरतों में से एक है लेकिन अब प्रश्न यह भी उठता है कि अगर जब जल ही ना हो या फिर इसकी कमी हो तो फिर क्या होगा,ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सामान्यतः भीषण जल संकट का सबव संपूर्ण बुंदेलखंड में है लेकिन जिले छतरपुर के अलावा बक्सवाहा मे हालात और भी बुरे है। यहां पर शुध्द पेय जल पाने के लिए किसी जगह पर एक किमी तो कही दो से तीन किमी तक जल लाने के लिए मुहताज होना पडता है।बकस्वाहा मे जल संकट की खासी कमी देखी जा रही है जहां पर अभी अप्रैल का माह शुरू ही हुआ है कि दिनों-दिन बढ़ती गर्मी के साथ ही साथ भीषण जल संकट ने भी अपने कडक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं हालात संपूर्ण जनपद क्षेत्र के अलावा नगर में तो और भी बदतर बने हुए हैं।
बने हुये है मुख्य सहारे।
हफ्तो अंतराल,नल से जल की सप्लाई।
नगर में हफ्तों के अंतराल से होने वाली पानी सप्लाई भी एक टूटा हुआ सहारा बनी हुई है लेकिन इस में दिक्कत की बात यह भी है कि पुरानी पाइप लाइन के जरिए नगर के कुछ हिस्सों में ही पानी पहुंचता है और पुरानी पाइप लाइन अत्यधिक पुरानी होने के कारण जगह-जगह से फूट चुकी है जिससे कई लीटर पानी सड़क पर बह कर बर्बाद हो जाता है।यह जलाशय भी हुए खाली।
करोड़ों की योजनाओं की लग रही है चपत।
यहां जल संकट से निपटने के लिए समय-समय पर शासन प्रशासन द्वारा विभिन्न योजनाएं भी चलायी गई उसी क्रम में लगभग बारह साल पहले एक करोड़ आठ लाख की लागत से जलावर्धन योजना के तहत नगर के वार्ड क्रमांक 13 हरिजन बस्ती इलाके में पानी की पूर्ति के लिए एक टंकी भी बनवाई गई जो आज तक चालू नही हुई जो आज भी केवल एक शोपीस गार्ड की तरह खडी हुई है। इसके पश्चात कुछ दिनों पहले लगभग तेरह करोड की लागत से पूर्ण होने वाली नल जल योजना भी चलाई गई जिसमें भी खास ढील के साथ ही नगर की सडको पर गड्ढे खोदकर उनको पूर्णतः ना भरने जैसी लापरवाही देखने को मिल रही है।
जल संकट: बनता रहा चुनावी मुद्दा
बक्सवाहा सहित विधानसभा क्षेत्र में भीषण जल संकट का मुद्दा पिछले दिनों विधानसभा चुनाव में भी खूब जोर-शोर के साथ गर्म हुआ लेकिन इस समस्या से अब तक किसी को निजात ना मिल सका अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में यह समस्या हल हो पाती है या नहीं।इनका कहना है कि....
नगर मे चार-पांच हैण्ड पम्प सूख रहे जिनकी हालत खराब है।लेकिन इसके अलावा किराये के टैकर से कुंओ मे जल भरवाकर पाइप लाइन के जरिए जल की पूर्ति भी की जा रही है। अतः इससे निपटने के लिए मेरे द्वारा और भी अन्य कार्य किये जायेगे।
