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शनिवार, 13 अप्रैल 2019

जन्म से नही है हाथ तो पैर से दे रही है परीक्षा।

पढ़ने का जज्बा ऐसा कि पैर से लिख कर दे रही है परीक्षा।


छात्रा के जन्म से ही नहीं है दोनों हाथ।


ब्यूरो छतरपुर। अगर कुछ कर गुजरने की चाहत और जज्बा हो तो कोई भी विघ्न आड़े नहीं आता।
 हौसलो और जज्बे की धनी ममता पटेल को पढ़ाई का ऐसा जुनून है कि जन्म से ही उसके दोनों हाथ न होने पर भी उसने स्कूल की  पढ़ाई पैर से उत्तर लिख कर पूरी की।
उसका एक छोटा अविकसित सा हाथ है, जिसमें पंजे की बजाए एक नाममात्र की अंगुली है, ऐसी ही विषम स्थिति में अब ममता महाराजा कॉलेज छतरपुर से बीए प्रथम वर्ष की वार्षिक परीक्षा बाएं पैर से कॉपी में उत्तर लिख कर दे रही है।
 महाराजा कॉलेज छतरपुर में कॅरियर काऊंसलर एवं वाणिज्य विभाग में पदस्थ डाॅ.सुमति प्रकाश जैन ने जब कॉलेज में ममता को पूरी लगन और उत्साह के साथ परीक्षा देते देखा तो सीधी सी दिखने वाली ममता की प्रेरक संघर्ष गाथा जानी।
साथ ही उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार ऐसी विशेष छात्रा के रूप में उसकी काउंसलिग कर डॉ जैन ने उसका हर प्रकार से सहयोग करने और कराने की बात कहते हुए उसका हौसला बढ़ाया।
ममता ने पेपर से फुरसत पाने के बाद बताया कि वह ग्राम तिलवां परा(राजनगर )के सामान्य कृषक श्री देशराज पटेल की इकलौती बेटी है। उसका एक बड़ा और एक छोटा भाई है, जो उसका पूरा ध्यान रखते है और  सहायता करते रहते हैं।
ममता ने बताया कि जन्म से ही उसके दोनों हाथ नहीं है, इस कारण उसके माता पिता उसकी इस कुदरती कमी को लेकर बहुत परेशान रहते थे। इसके बाद भी उन्होंने उसे स्थानीय शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने भेजा तो सभी ने कहा कि वो कैसे लिखेगी-पढ़ेगी???
इसका उत्तर देते हुए ममता ने बताया कि उसने अपनी इस गंभीर समस्या को ईश्वर की मर्जी और एक चुनौती समझ कर स्वीकार किया और बचपन से छोटी कक्षा में पैर से लिखने का अभ्यास किया।
शुरू शुरू में तो मुझे लिखने में बहुत कठिनाई होती थी और देर भी लगती थी। पैर से लिखते देख स्कूल के बच्चे और गांव के लोग कौतूहल भारी नजरों से देखते थे, साथ ही मेरा हौसला भी बढ़ाते थे।धीरे धीरे उसकी मेहनत रंग लाई ओर फिर वो शीघ्रतापूर्वक और अच्छी लिखावट में लिखने लगी। इसी के चलते उसने पिछले वर्ष द्वितीय श्रेणी के साथ 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास की और महाराजा कॉलेज जैसे नामी ओर बड़े कॉलेज में उसे पढ़ने का गौरव मिल गया।
      2 जून 2000 को सामान्य माली हालत वाले किसान देशराज-उर्मिला पटेल के घर जन्मी ममता पटेल बताती है कि जिस तरह उसे अपने स्कूल में सभी शिक्षकों ने हर तरह का सहयोग तथा मार्गदर्शन दिया, वैसा ही सहयोग व मार्गदर्शन उसे महाराजा कॉलेज के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों से मिलता रहता है।
  कॉलेज की नियमित छात्रा के रूप में  आसमानी यूनिफार्म में आने वाली ममता पटेल ने बताया कि उसे अपनी इस अक्षमता के कारण अनेक दैनिक कार्यो में भारी परेशानी का सामना प्रतिदिन करना पड़ता है, लेकिन अपने परिजनों की मदद, स्नेह और प्रेरणा के कारण वह निरन्तर अपनी पढ़ाई और सभी काम सम्पन्न करती आ रही है।ममता अपनी इस कमी के लिए ईश्वर को भी कोई दोष नहीं देती।
उसका मानना है कि आज के समय मे अच्छे खासे हाथ पैर वाले बच्चे ढंग से पढ़ाई नहीं कर अपने माता पिता का सिर दर्द बने हैं और अपना भविष्य फालतू की चीजों में खराब कर रहे हैं, जबकि वह इतनी बड़ी कमी के बाद हर साल अच्छे से पढ़ती तथा पास होती आरही है।
उसकी यह अपंगता उसे अपना लक्ष्य पाने को ही प्रेरित करती है।
ममता की पढ़ाई के प्रति चाहत को देखते हुए उसके चाचा उसे हर पेपर में 18 किमी दूर तलवां परा से परीक्षा दिलाने महाराजा कॉलेज लाते और वापस ले जाते हैं।
ममता ने बताया कि वह पढ़ लिख कर सरकारी सर्विस करना चाहती है ताकि उसका भविष्य अच्छा बन सके और अपने पैरों पर खड़े होकर अपने माता पिता की चिंता दूर कर सके।