शासन की योजनाये बनी मजाक,अस्पताल में लापरवाही का आलम।
स्वास्थ सेवाओ की खुली पोल।
(विभाग में कम ही नजर आते है चिकित्सक,स्वास्थकर्मी)
ब्यूरो छतरपुर । विभागीय उदासीनता से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाऐं बद से बदत्तर हो गई है। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही व मनमर्जी से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाऐं का लाभ नही मिल पा रहा है।
ऐसे में झोला छाप डॉक्टर्स की चांदी कट रही है। जिले के क्षेत्र में भगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सबसे ज्यादा दुर्दशा का शिकार है। यहाँ पदस्थ्य डॉक्टर्स हमेशा ही अपनी कर्तव्यस्थली से नदारत रहते है ऐसे में मरीजो को इलाज के लिये इधर-उधर भटकना पड रहा है।
मरीजों के समुचित इलाज हेतु सरकार ने बडामलहरा बि.खं. में 4 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 24 उपस्वास्थ्य केंद्र व 152 आरोग्य केंद्र खोले है। लेकिन स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से स्वास्थ्य सेवाऐं लचर बनी हुई है और यहाँ पर पदस्थ्य डॉक्टर्स व स्वास्थ्यकर्मी अक्सर अपने कर्तव्य क्षेत्र से नदारत रहते है और जो कर्मचारी ड्यूटी पर रहते भी है वह सुबिधा शुल्क लेकर मरीजों का इलाज करते है। मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहाँ हरगोविंद राजपूत, मोहित राजपूत व आयुष डॉक्टर बीकेश असाटी, सहित अन्य स्टाप पदस्थ्य है। मुख्यालय पर एक भी डॉक्टर्स उपस्थित न रहने से मरीजो को समय पर और आपातकालीन सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गीता अहिरवार निवासी लडइयाखेरा गर्भवती है, शुक्रवार सुबह 9 बजे के आसपास वह जांच कराने के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भगवां आई थी। अस्पताल में मौजूद स्वीपर व एक अन्य कर्मचारी से पूंछने पर बताया कि, थोडी ही देर में डॉक्टर आने वाले है। काफी देर इंतजार करने के बाद भी अस्पताल में डॉक्टर नहीं आये महिला को वापस घर लौटना पडा।
मेडीकल के थाम रहे पर्चा,अतिरिक्त बसूली के आरोप।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट व अन्य स्वास्थ्य कर्मी जमकर धांधली कर रहे है। बताया जा रहा है कि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों को बाजारू दवाई की दुकानों के पर्चे थामाऐ जा रहे है और ड्रिप लगाने व अन्य अन्य सुबिधाओं के पैसे बसूले जा रहे है।सरदार बल्लभ भाई पटेल योजना के तहत अस्पताल में सरकार ने 72 प्रकार की दवाऐं उपलब्ध कराई है। योजना अंतर्गत सबंधित मरीजों को निशुल्क दवाऐं वितरण करने की योजना है, मगर विभागीय मनमानी से ग्रामीणों को शासकीय योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों की मानें तो अस्पताल में पदस्थ आयुष डॉक्टर बीकेश असाटी अंग्रेजी दवाओं के पर्चे लिख रहे है। फर्मासिस्ट अतुल जैन और अशोक असाटी, डॉक्टर्स की अनुपस्थित में नियम विरुद्ध तरीके से मरीजों का इलाज करते है और अस्पताल के बाहर संचालित मेडीकल दुकानों के पर्चा बनाकर दे रहे है। एक आशा कार्यकर्ता और ग्रामीण ने नाम गोपनीय रखते हुऐ बताया कि, इन्होनें अस्पताल में ड्रिप चढने के ऐबज में 80 रुपये ऐंठ लिये।
एक्सपायरी कर दवाऐं की जाती है आग को भेंट।
कमीशन खोरी के चक्कर में मरीजों को बाहरी दवाऐं लिखी जा रही है और सरकार से मिलनें वाली कीमती दवाऐं एक्सपायरी होनें के बाद उन्हें जलाया जा रहा है। हाल ही में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ढेरों एक्सपायरी दवाऐं आग के हवाले की गई है।आरोग्यम् केंद्रो पर लचर हुई व्यवस्थाये।
गर्भावस्था व प्रसव में देखभाल, नवजात शिशु की देखभाल, बाल व किशोर स्वास्थ्य सेवाएं, परिवार नियोजन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं, संक्रामक रोग प्रबंधन, असंचारी रोगों की रोकथाम नियंत्रण प्रबंधन, नाक कान गला के सामान्य रोगों का उपचार, आंख के सामान्य रोगों का इलाज, मानसिक स्वास्थ्य इलाज व सेवाएं, दांत के सामान्य रोगों का इलाज, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाऐं देने के उद्देश्य से सरकार ने विगत 7 वर्ष पूर्व आरोग्यम् स्वास्थ्य केंद्र योजना शुरु की है।
आरोग्यम् केंद्रों में आयुष पद्धति और योग आदि के माध्यम से स्वास्थ्य जीवन शैली सबंधी परामर्श भी दिया जाऐगा। योजना अंतर्गत बिखं. क्षेत्र में 152 केंद्र खुले है। लेकिन शासन की मंशा अनुसार सेवाऐं न मिलने से यह केंद्र अब मजाक बनकर रह गये है।

